दो दिवसीय प्रशिक्षण में किसानों को दी मशरूम उत्पादन की तकनीकी जानकारी

संजीव शर्मा.
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि​ विवि में किसानों को मशरूम उत्पादन की जानकारी दी गई। दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए निदेशक शोध डॉ अनिल सिरोही ने कहा की मशरूम की खेती से कृषि की आय को बढ़ाया जा सकता है। थोड़ी सी जगह में मशरूम उत्पादन की शुरुआत करनी चाहिए और जब एक्सपर्ट हो जाएं तो अपने गांव में इसका विस्तार कर लेना चाहिए।
कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय समन्वित मशरूम अनुसंधान परियोजना सहयोग से एससी एसटी प्रशिक्षणार्थियों के लिए आयोजित दो दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण संपन्न हुआ। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरके मित्तल ने बताया कि विश्वविद्यालय कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न जिलों के किसानों को तकनीकी ज्ञान देने के लिए प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। ताकि विश्वविद्यालय कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न जिलों के किसान लाभान्वित हो सके एवंं कृषि विविधीकरण को अपनाकर अपनी आए को बढ़ा सकें।

कार्यक्रम के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉक्टर गोपाल सिंह ने कहा मशरूम उत्पादन से आय को बढ़ाया जा सकता है। गुणवत्ता युक्त प्रोटीन विटामिन खनिज लवण व फाइबर के कारण इसे एक स्वस्थ आहार की संज्ञा दी जा सकती है। डॉ गोपाल सिंह ने कहा की अच्छी गुणवत्ता वाले पौधों से प्राप्त मशरूम में प्रोटीन अधिक होती है। मनुष्य के शरीर के लिए आवश्यक सभी 20 अमीनो अम्ल मशरूम में पाए जाते हैं, इसके सेवन से शरीर में इम्युनिटी की मात्रा बढ़ती है। उन्होंने बटन मशरूम, डिंगरी मशरूम, मिल्की मशरूम आदि के बारे में जानकारी दी।
आर एस सेंगर ने मशरूम में बायोटेक्नोलॉजी की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया मशरूम सफेद, भूरा, पीला, गुलाबी तथा कत्थई रंग के हो सकते हैं। वातावरण के प्रभाव से इनके रंगों में परिवर्तन होता है। यह आकार में सीपी नुमा या एक बड़े चम्मच की तरह होता है। इसका डंठल छोटा या बड़ा हो सकता है। इस की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं।
डॉ पीके सिंह, डॉ रमेश यादव, डॉ हरिओम कटिहार, डॉ प्रशांत मिश्रा, डॉ कमल खिलाड़ी, डॉ रामजी सिंह, आदि ने विभिन्न विष्यों पर तकनीकी जानकारी प्रशिक्षण के दौरान उपलब्ध कराई इस प्रशिक्षण में 20 एसी एसटी कृषकों ने भाग लिया।

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