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बच्चों की आन लाइन पढ़ाई बनी मनोरंजन, टीचर का चेहरा देख रहे बच्चे

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नवीन चौहान
कोरोना संक्रमण में बच्चों को स्कूल से जोड़कर रखने के लिए शुरू की गई आन लाइन पढ़ाई की व्यवस्था बच्चों का मनोरंजन बनकर रह गई है। घर में बैठे स्टूडेंटस मोबाइल में अपनी टीचर कस चेहरा देखकर ही खुश है। बच्चों को टीचर की डांट का भी खौफ नही है। टीचर बच्चों की उपस्थिति ही दर्ज कर पा रही है। बच्चों को कभी आवाज नही आ रही है तो कभी नेटवर्क गायब हो रहे है। कुल मिलाकर कहा जाए तो पढ़ाई कम और मनोरंजन ज्यादा हो रहा है। ऐसे में आन लाइन पढ़ाई के बहाने बच्चों के हाथों में मोबाइल जरूर आ गया है। बच्चों को मोबाइल ना देने की टीचरों की नसीहत बेमानी साबित हो गई है। टीचर बच्चों को मोबाइल से दूर रहने की सलाह शायद ही कभी दे पाए।
आधुनिक युग में तकनीक ​शिक्षा का महत्व बहुत ज्यादा है। तकनीक के बिना कुछ भी संभव नही है। लेकिन तकनीक के मामले में भारत दूसरे देशों की तुलना में काफी पीछे है। हालांकि इसकी कई वजह है। लेकिन आज हम बात कर रहे कोरोना संक्रमण में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की कवायद में आनन—फानन में शुरू की गई आन लाइन शिक्षा प्रणाली की। स्कूल प्रबंधन ने आन लाइन शिक्षा प्रणाली को लागू करने की पहल तो कर दी लेकिन प्रभाव और कुप्रभाव के बारे में गंभीरता से विचार नही किया। बच्चों को मोबाइल की लत पहले से ही थी और अब तो पढ़ाई के बहाने खुली छूट मिल गई। ऐसे में बच्चे मोबाइल से कभी दूर नही होंगे। दूसरी गंभीर बात भारत के स्कूलों में बच्चे स्कूल क्लास में टीचर के सामने बैठकर तो पढ़ाई करते नही है वो घर में बैठकर मोबाइल से आसानी से पढ़ाई करेंगे। यह विचारणीय है। टीचर क्लास में तो बच्चों को शांत करा नही पाती। कई बार तो उनको क्लास से बाहर तक खड़ा होने की सजा देनी पड़ती है। ऐसे में मोबाइल पर बच्चों को चुप करा पायेंगी। बहुत सारी सामान्य समस्या है और बाते भी। लेकिन सबसे पहले बात करते है आन लाइन पढ़ाई की।

आन लाइन पढ़ाई कराने के लिए गूगल मीट और जूम एप्प है। ज्यादातर स्कूल गूगल मीट का उपयोग कर रहे है। अब गूगल मीट के पढ़ाई के सिस्टम को समझते है। गूगल मीट एप्प को प्ले स्टोर से मोबाइल में डालनलोड करते है। इस एप्प में एक साथ 100 यूजर्स जुड़ सकते है। स्कूलों ने गूगल मीट डाउनलोड कराकर क्लास के एक सेक्शन को जोड़ लिया जाता है। हालांकि इस गूगल मीट से जुडने के लिए बच्चे की ईमेल आईडी जरूरी है। अब बच्चों की ईमेल आईडी बनाने को लेकर भी अभिभावकों को कई प्रकार की समस्या उत्पन्न हो जाती है। गूगल 13 साल से कम आयु के बच्चों की ईमेल आईडी बनाने में दिक्कत करता है। ऐसे में बच्चों को अपने मम्मी पापा की ईमेल आईडी से गूगल मीट ज्वाइन करनी पड़ती है। या फिर बच्चों की ईमेल आईडी बनानी है तो उनकी आयु को गलत तरीके से दर्शाकर ईमेल आईडी बनानी होगी। या फिरफैमिली ग्रुप में मम्मी पापा की ईमेल आईडी एक अभिभावक के तौर पर दिखाकर ईमेल बनानी होगी।
गूगल मीट में टीचर भेजेंगा मीटिंग कोड
गूगल मीट में टीचर बच्चों के व्हाटसएप पर मीटिंग कोड भेजता है। इस कोड को बच्चा ओपन करता है। जिसके बाद बच्चे और टीचर के बीच समन्वय बन जाता है। जिसके बाद टीचर और बच्चों का संपर्क एक दूसरे से जुड़ जाता है। वीडियो काल की तरह बातचीत शुरू हो जाती है।
आन लाइन पढ़ाई की समस्या
गूगल मीट से जुड़ने के बाद आन लाइन पढ़ाई की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। ऐसे में अगर नेटवर्क खराब है तो पढ़ाई ठप्प हो गई। टीचर पढ़ाई कराने के दौरान सभी बच्चों के मोबाइल की आवाज को बंद करा देती है। अगर बच्चों के मोबाइल की आवाज को बंद नही कराया तो सभी हल्ला गुल्ला सुनते रहेंगे। ऐसे में टीचर को किसी बच्चे से कोई प्रश्न पूछना है तो वह बच्चे के मोबाइल की आवाज को खुलवाया जायेगा और तभी बच्चा कुछ बता पायेगा।
बच्चे को बोर होने से बचाना
आन लाइन पढ़ाई कराने के दौरान बच्चों को बोर होने से ही रोकते हुए जोड़कर रखना भी चुनौती है। बच्चे बोर ना हो जाए तो टीचर को बीच—बीच में हंसाना भी होगा। उनको समझाना भी होगा। बच्चे मोबाइल छोड़कर गायब ना हो जाए।

अभिभावकों का खर्चा बढ़ा
आन लाइन पढ़ाई के चक्कर में अभिभावकों को मोबाइल व कंप्यूटर खरीदने का खर्च भी बढ़ गया है। बच्चों का नेट रिचार्ज कराने की जिम्मेदारी है। वही स्कूल क्लास के बाद उनसे मोबाइल वापिस लेना सबसे बड़ी समस्या है।
कुल मिलाकर कहा जा जाए तो आन लाइन पढ़ाई कराना टीचर के लिए एक गंभीर चुनौती है। टीचर को क्लास से ज्यादा मेहनत मोबाइल और कंप्यूटर पर करनी पड़ रही है। लेकिन बच्चों की समझ में कुछ आयेगा ये कह पाना मुश्किल है। हालांकि आन लाइन पढ़ाई से बच्चों का मानसिक विकास तो नही होगा। लेकिन कुछ घंटे टीचरों से जुड़े रहने तक यह एक मनोरंजन तक ही सीमित है।

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