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यात्री बनकर पहुंचे डीएम ने पकड़ी पुलिस और कर्मचारियों की लापरवाही

नवीन चौहान
किस्से कहानियों में तो कई बार पढ़ा होगा कि एक राजा था जो रात्रि में पहचान छिपाकर प्रजा की समस्याओं को दूर करने के लिए निकलता था। गड़बड़ी मिलने पर एक्शन लेता था। लेकिन हकीकत में ऐसी बातें कभी देखने को नही मिली। लेकिन रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल इसको हकीकत में कर दिखाया। डीएम ने अपनी पहचान छिपाते हुए एक साधारण यात्री के तौर पर कंधे में बैंग रखकर केदारनाथ यात्रा की ओर रूख किया। यात्रा मार्ग पर रात्रि विश्राम किया और तमाम समस्याओं का बारीकी से निरीक्षण किया। यात्रियों की समस्याओं को महसूस और उनको दूर करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए। जिसके बाद जिलाधिकारी ने आलाधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए।

रूद्रप्रयाग जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल 9 जून की रात्रि करीब एक बजे निजी वाहन से प्रातः 11ः00 बजे तक स्थान गौरीकुण्ड एवं गौरीकुण्ड घोड़ा पड़ाव तक एक यात्री के रूप में गुप्त रूप से निरीक्षण करते रहे। उन्होंने बतौर यात्री रात्रि प्रवास गौरीकुण्ड घोड़ा पड़ाव में किया। तथा यात्रा मार्गो की तमाम व्यवस्थाओं को परखा। डीएम ने पाया गया कि गौरीकुण्ड घोड़ा पड़ाव में रात्रि 1ः00 बजे से केदारनाथ हेतु घोड़े-खच्चरों का संचालन शुरू हो जाता है। घोड़े-खच्चरों की व्यवस्था देखने पर स्पष्ट हुआ कि जवानों के अभाव में घोड़ा पड़ाव पर अत्यन्त अव्यवस्था फैली हुई है। घोड़े खच्चर के स्वामियों द्वारा घोड़े-खच्चरों को रास्ते पर ही खड़ा किया जाना पाया गया, जिससे यात्रियों को अत्यन्त परेशानियां होनी पायी गईं। इस बीच घोड़ा पड़ाव पर पुलिस/होमगार्ड का कोई भी जवान तैनात नहीं पाया गया। निरीक्षण के दौरान प्रातः 5ः00 बजे से 9ः00 बजे तक 4 जवान उपस्थित पाये गये, जिन्हें स्वयं भी यह पता नहीं था कि उन्हें क्या कार्यवाही करनी है। प्रातः 9ः00 बजे के पश्चात मात्र 1 जवान गौरीकुण्ड घोड़ा पड़ाव पर उपस्थित मिला। श्री केदारनाथ यात्रा-2019 की समय-समय पर आहूत बैठकों में पुलिस विभाग से सहमति बनी थी कि केदारनाथ जाने वाले प्रत्येक घोड़े-खच्चर की जांच पुलिस के जवानों द्वारा गौरीकुण्ड से आगे की जायेगी, जिससे कोई नाबालिक हाॅकर घोड़े-खच्चरों का संचालन न कर सके एवं एक से अधिक घोड़े-खच्चरों के साथ एक ही हाॅकर न चल सके, जिससे यात्रियों के घोड़े-खच्चरों से गिरने की सम्भावना कम हो सके। इस संबंध में चौकी प्रभारी गौरीकुण्ड को कई बार निर्देशित किया जा चुका है, परन्तु केदारनाथ यात्रा प्रारम्भ होने के 1 माह पश्चात भी चौकी प्रभारी गौरीकुण्ड द्वारा यह व्यवस्था प्रारम्भ नहीं की गई है, जो अत्यन्त खेदजनक है।

एक जवान मिला डयूटी पर

डीएम ने पाया कि गौरीकुण्ड घोड़ा पड़ाव पर प्रातः 5ः00 बजे पश्चात मात्र 1 जवान ड्यूटी पर आया। इससे स्पष्ट होता है कि गौरीकुण्ड घोड़ा पड़ाव जिससे यात्रियों का संचालन पूरे 24 घण्टे होता है एवं यात्रियों तथा घोड़े-खच्चरों की अधिकतम भीड़ रहती है वहां पर पुलिस के जवानों द्वारा मात्र 04 घण्टे की ड्यूटी दी जा रही है, जो अत्यंत गंभीर मामला है।पुलिस व्यवस्था मिली लचरजिलाधिकारी द्वारा प्रातः 11ः00 बजे गौरीकुण्ड का निरीक्षण किया गया, तो पाया गया कि 1 जवान घोड़ा पड़ाव पर, 1 जवान तप्तकुण्ड पर तथा 1 होमगार्ड का जवान शटल सेवा पर तैनात पाया गया। इसके अतिरिक्त पूरे गौरीकुण्ड में किसी भी स्थान पर पुलिस के जवानों की उपस्थिति कहीं भी नहीं देखी गई। इस संबंध में स्थानीय वाहन चालकों एवं व्यक्तियों से पूछताछ की गई तो उनके द्वारा आक्रोशित होकर अवगत कराया गया कि गौरीकुण्ड में पुलिस की व्यवस्था अत्यधिक कमजोर है।

 गौरीकुण्ड शटल सेवा में मात्र 01 ही होमगार्ड का जवान तैनात होने से गौरीकुण्ड से सोनप्रयाग के बीच वाहनों का काफी लम्बा जाम लगा हुआ पाया गया एवं शटल सेवा की गाड़ियां गौरीकुण्ड से सोनप्रयाग समय से पहुंचनी नहीं पायी गईं। इसके विपरीत सोनप्रयाग में 6-7 जवान शटल सेवा की ड्यूटी पर तैनात पाये गये। यहां पर यात्रियों की लम्बी कतार शटल सेवा के वाहनों का इंतजार करती हुई पायी गई परन्तु वाहनों के समय पर न आने से यात्रियों की लम्बी लाईन बढ़ती जा रही थी तथा पुलिस की इस लचर व्यवस्था को देखते हुए यात्री काफी आक्रोशित होने पाये गये।

डीएम के आदेश पर हटाए चौकी प्रभारी 

जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने पुलिस अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से चौकी प्रभारी गौरीकुण्ड को हटाते हुए उनके विरूद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारम्भ करने के निर्देश दिए। इस के अलावा उनके स्थान पर किसी कार्यकुशल पुलिस अधिकारी की तैनाती करने को कहा है। पुलिस व्यवस्था सुचारू रखने और तीर्थ यात्रियों में पुलिस प्रशासन की अच्छी छवि प्रसारित करने के लिए कर्तव्यनिष्ठा से डयूटी करने के निर्देश दिए गए।

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