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उत्तराखंड पुलिस के जवानों को मिले 30 प्रतिशत जोखिम भत्ता

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नवीन चौहान
उत्तराखंड पुलिस के जवान जान जोखिम में डालकर बदमाशों का पीछा करते है और उन्हें गिरफ्तार करते है। जिससे उनकी जान को खतरा बना रहता है। पूर्व में कई बार आपराधिक घटनाओं को रोकने के दौरान कांस्टेबल की मौत हुई है। ऐसे में एलआईयू के साथ—साथ अन्य पुलिसकर्मियों जैसे जल पुलिस,पीएसी, सिविल पुलिस व फायर सर्विस को 30 प्रतिशत जोखिम भत्ता दिए जाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेंजे जाने के लिए पत्र भेजा गया है।
पुलिस महानिदेशक,देहरादून, उत्तराखंड अनिल रतूड़ी को भेजे पत्र में हरिद्वार के अधिवक्ता अरूण भदौरिया ने बताया कि सूचना अधिकार अधिनियम के तहत पुलिस मुख्यालय से पुलिसकर्मियों के जोखिम भत्ते की बाबत जानकारी मांगी गई थी। सूचना में पता चला कि एलआईयू को 30फीसदी जोखिम भत्ता दिया जाता है। ऐसे में उन्होंने बताया कि कोतवाली गंगनहर में कांस्टेबल सुमित नेगी की डयूटी के दौरान बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके अलावा कनखल थाने के तत्कालील कांस्टेबल भानू सिंह पर वारंट तामील कराने के दौरान चाकू से जानलेवा हमला हो गया था। इसके अतरिक्त जल पुलिस जान जोखिम में डालकर पीड़ितों को डूबने से बचाती है। जबकि दमकल विभाग अपनी जान को खतरे में डालकर दूसरों की जिंदगी को बचाने का कार्य करते है। ऐसे में पीएसी भी असंवेदनशील स्थानों पर डयूटी कर शांति व्यवस्था बनाने का कार्य करती है। जिससे उनकी जान को खतरा बना रहता है। अधिवक्ता अरूण भदौरिया ने पत्र में कहा कि पुलिस मुख्यालय पुलिसकर्मियों के हितों को ध्यान में रखते हुए 30फीसदी जोखिम भत्ता दिए जाने का एक प्रस्ताव उत्तराखंड सरकार को भेंजे। जिससे सरकार पुलिसकर्मियों के ​हितों पर गंभीरता से विचारकर प्रभावी कदम उठा सकें।

फोटो प्रतीकात्मक है।

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