बच्चों के माता-पिता की मौजूदगी में हुआ डीएवी हरिद्वार में विद्यारम्भ संस्कार

नवीन चौहान.
डीएवी सेन्टेनरी पब्लिक स्कूल जगजीतपुर में जहां बच्चों को किताबों के ज्ञान में महारथ हासिल करायी जाती है वहीं दूसरी और यहां पढ़ने वाले बच्चों में संस्कारों का भी ज्ञान कराया जाता है। यहां से पढ़कर बच्चे न केवल अपने प्राप्त ज्ञान से देश विदेश में नाम रोशन करते हैं बल्कि अपने संस्कारों से भी सभी दिल जीत लेते हैं।

इसी कड़ी में आज डी.ए.वी. सेन्टेनरी पब्लिक स्कूल, जगजीतपुर, लक्सर रोड, हरिद्वार में विद्यालय की कक्षा नर्सरी में प्रवेश लेने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों का विद्यारम्भ संस्कार किया गया। विद्यारम्भ संस्कार प्रतिवर्ष किया जाता है किन्तु इस वर्ष इसका स्वरूप कुछ विशेष है। इस अवसर पर विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके माता-पिता को भी आमन्त्रित किया गया।

वैदिक परम्परानुसार विद्यालय में हवन का आयोजन कर उस निर्विकार प्रभु से इन बच्चों के सुखद भविष्य की कामना की गई तथा विद्यारम्भ संस्कार किया गया। मुख्य अतिथि स्वामी नित्यानन्द जी ने विद्यार्थियों को अपना शुभाशीष देते हुए उनके सुखद भविष्य की कामना की। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चा विद्यालय में आते ही विद्यार्थी बन जाता है, जहाँ उसे ज्ञानार्जन करना है, किन्तु किताबी ज्ञान के साथ-साथ विद्यालय में बच्चा कई प्रकार से सीखता है।

अपने सहपाठियों से मिल-जुल कर रहना, कई प्रकार के खेल जो केवल मनोरंजन ही नहीं करते वरन् शारीरिक एवं मानसिक दृढ़ता के साथ-साथ खेल भावना का विकास भी करते हैं, मनुष्य एवं प्रकृति के प्रति स्नेह की भावना, अध्यापकों एवं बड़ों के प्रति सम्मान की भावना, अपनी सभ्यता एवं संस्कृति के प्रति सम्मान एवं उसकी रक्षा, समाज एवं देश प्रेम, इन सभी का विकास भी विद्यालय में होता है।

माता-पिता को भी स्कूल में सिखाए गए पाठ तथा व्यवहारिक शिक्षा का सम्मान करते हुए बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने के प्रेरणा देनी चाहिए। उन्होंने विद्यालय द्वारा किए गए आयोजन की सराहना की तथा अपनी शुभकामनाएं दी। प्री-प्राइमरी कक्षाओं की सुपरावाइज़री हैड कुसुम बाला त्यागी ने वहाँ उपस्थित सभी का धन्यवाद करते हुए बच्चों को अपना प्रेम एवं आशीर्वाद दिया।

विद्यालय के कार्यवाहक प्रधानाचार्य मनोज कुमार कपिल ने कहा कि बच्चा अपने माता-पिता को छोड़कर विद्यालय में ज्ञानार्जन के लिए आता है। अपने घरों एवं माता-पिता से दूर हुए इन छोटे-छोटे बच्चों को हमारे विद्यालय की अध्यापिकाएं बड़ी ही कुशलता से सम्भालती हैं, उन्हें प्यार एवं दुलार से कक्षा में बैठना सिखाती हैं, शिष्टाचार सिखाते हुए खेल-खेल में उनकी शिक्षा आरम्भ होती है।

कहा कि धीरे-धीरे बच्चा बड़ा होकर विद्यालयी शिक्षा पूर्ण कर जब जाता है तो उसके सभी शिक्षकों को यह आशा एवं विश्वास होता है कि उनका विद्यार्थी जीवन में अवश्य ही एक अच्छा इंसान एवं सफल व्यक्ति बनेगा। उन्होंने सभी बच्चों को अपना आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रसाद वितरण के पश्चात् कार्यक्रम का समापन हुआ।

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