… सीएम के तौर पर 4 साल तक अन्य के मुकाबले बेहतर साबित हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत





नवीन चौहान.
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को जन्मदिन की शुभकामनाएं। अब तक के मुख्यमंत्रियों में त्रिवेंद्र सिंह रावत मुझे सबसे बेहतर मुख्यमंत्री लगे। पार्टी के अपने लोगों के कुप्रचार तंत्र का शिकार होकर अपना कार्यकाल पूरा करने से साल भर पहले ही उन्हें हटा दिया गया लेकिन चार सालों तक वह मुख्यमंत्री के तौर पर अन्य के मुकाबले बेहतर साबित हुए।

रैथल गांव का निवासी होने के नाते मैं उनका शुक्रगुजार हूं कि जब वह मुख्यमंत्री थे तो तत्कालीन गंगोत्री विधायक स्व. गोपाल सिंह रावत जी के प्रस्तावों को कभी लंबित नहीं रहने दिया। पर्यटन गांव रैथल में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व तत्कालीन विधायक स्व. गोपाल सिंह रावत जी की विकासोन्मुखी जुगलबंदी से करोड़ों रूपये की लागत के विकास कार्य हुए। नए मोटर मार्गों को स्वीकृति देने से लेकर रैथल दयारा बार्सू ट्रैक निर्माण, रैथल में ग्रोथ सेंटर का निर्माण, रैथल में उद्यान विभाग की भूमि पर पैक हाउस का निर्माण, रैथल मंदिर परिसर में पांचगाईं विश्राम गृह का निर्माण, नाग देवता, सती देवी, पोखू देवता मंदिर की मरम्मत/पुनर्निर्माण में सहयोग, रैथल के बीचों बीच पार्किंग का निर्माण व पहुंच मार्ग का निर्माण, जल जीवन मिशन के तहत रैथल नटीण गांव के लिए पेयजल योजना की स्वीकृति, फलपट्टियों को जोड़ने के लिए मोटर मार्ग निर्माण का प्रस्ताव, रैथल चढेथी मोटर मार्ग के चैड़ीकरण की स्वीकृति समेत रैथल हैलीपेड और रैथल गोरसाली मोटर मार्ग का डामरीकरण भी शामिल रहा।

इसके साथ ही उत्तरकाशी जनपद को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तत्कालीन विधायक स्व. गोपाल सिंह रावत के प्रस्तावों को स्वीकृति देते हुए बस अड्डे के निर्माण के लिए धनराशि की स्वीकृति, जोशियाड़ा ज्ञानसू के बीच आर्च ब्रिज के लिए धनराशि की स्वीकृति, भारत तिब्बत व्यापार की स्मृति गर्तांगली का पुनर्निर्माण कर उसे पर्यटकों के लिए खोला गया, उत्तरकाशी में वाटर स्पोर्ट्स का आयोजन, भटवाड़ी आपदा प्रभावितों के विस्थापन की धनराशि जारी करवाने समेत कई महत्वपूर्ण सौगात उत्तरकाशी को दी।

राजकाज के मामले में भी त्रिवेंद्र सिंह रावत बेहतर मुख्यमंत्री थे। अपनी कड़क छवि और फैसले लेने के लिए जाने जाते रहे। हालांकि, कई फैसलों पर उनके यू टर्न ने उनकी किरकिरी करवाई लेकिन ज्यादातर राज्यहित में लिए गए फैसलों पर वह डटे रहे। स्व. गोपाल सिंह रावत जी के निजी सहयोगी के रूप में मुख्यमंत्री के तौर पर त्रिवेंद्र सिंह रावत के वर्किंग स्टाइल को नजदीक से देखने का मौका भी मिला। स्व. गोपाल सिंह रावत व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी आपस में खूब पटती थी या यूं कहें कि गोपाल सिंह रावत के प्रस्तावों को हमेशा ही उन्होंने प्राथमिकता दी और गंगोत्री विधानसभा को महत्वपूर्ण सौगातें दी।

हालांकि, उनके मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद कुछ महीनों बाद कैंसर से विधायक गोपाल सिंह रावत का भी निधन हो गया। उसके बाद दो अन्य मुख्यमंत्री राज्य को मिले लेकिन उत्तरकाशी गंगोत्री विधानसभा के प्रस्तावों को फिर वह प्राथमिकता न मिली। महत्वपूर्ण सड़क मार्गों के साथ ही अन्य प्रस्ताव चुनाव से पहले तक सचिवों के टेबल पर ही घूमते रहे। हालांकि, अब स्व. गोपाल सिंह रावत के विधायक के तौर पर तैयार की गई योजनाओं जो स्वीकृति के आखिरी चरण में अटकी थी तो अटकी ही रह गई, मालूम चल रहा है कि अब उन प्रस्तावों को स्वीकृति मिल रही है लेकिन बेहद सुस्त गति से….
खैर, त्रिवेंद्र सिंह रावत को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

नोट:— उत्तराखंड की जनता पंकज की फेसबुक वॉल से साभार



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