अंग्रेजों के खिलाफ ताना मारकर भरा था नगर की वेश्याओं ने जोश, भीड़ ने लगा दी थी अंग्रेजों के बंगलों में आग

नवीन चौहान.
मेरठ। 10 मई 1857 को मेरठ से क्रांति की पहली चिंगारी फूटी थी। यह चिंगारी तब फूटी थी जब 85 देसी सैनिकों ने चर्बी लगे कारतूस मुंह से खोलकर चलाने से इंकार कर दिया था। इन 85 देसी सैनिकों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई की गई और बाद में उन्हें जेल में बंद कर दिया गया। इसके साथ ही विद्रोह की चिंगारी फूटने लगी और और 10 मई की शाम 6 बजे तक पूरे शहर में विद्रोह का उबाल फूटकर सामने आने लगा।

इतिहास के पन्नों में यह भी जिक्र मिलता है कि स्वतंत्रता संग्राम की पहली चिंगारी जब फूटी तो सदर बाजार की वेश्याओं ने भी देसी सैनिकों में ताने मारकर जोश भरा था। इस बात की पुष्टि मेरठ में राजकीय संग्राहलय के पूर्व अध्यक्ष डा.मनोज गौतम गजेटियर में होने की करते हैं। इतिहास के पन्ने पलटने पर इस बात का उल्लेख मिलता है कि वेश्याओं ने लोगों को अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने के लिए उकसाया था।

इतिहासकार विघ्नेश कुमार की पुस्तक मेरठ के पांच हजार वर्ष में भी इस बात का उल्लेख है कि वेश्याओं ने देसी सैनिकों को ताने मारकर ​अंग्रेजों के खिलाफ उकसाया था। अंग्रेज फौज में शामिल 85 सैनिकों को गिरफ्तार करने के बाद वेश्याओं ने अंग्रेज सेना में शामिल देसी सैनिकों से ताना मारकर कहा था कि धर्म की रक्षा के लिए उनके भाई बेडियों में कैद हैं और वह कायरों की तरह घूम रहे हैं। उसके बाद लोग अपने घरों से निकलकर सड़कों पर आ गए। इसके बाद अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला भड़कती चली गई।

स्वतंत्रता सेनानी रत्नाकर शास्त्री के पुत्र शीलेंद्र कुमार बताते हैं कि 10 मई को हुए विद्रोह के दौरान चारों ओर से एक ही शोर उठ रहा था फिरंगियों को मारो। गुस्सायी भीड़ ने अंग्रेजों के बंगलों में आग लगा दी थी। उस दिन उग्र भीड़ के सामने जो भी अंग्रेज आया उस पर हमला बोल दिया गया। विक्टोरिया पार्क से सैनिकों को छुड़ाने के बाद केसरगंज जेल पर धावा बोल कर यहां बंद हिंदुस्तानियों को रिहा कराया गया।

अंग्रेजों के खिलाफ सदर बाजार से 10 मई 1857 में स्वतंत्रता की पहली चिंगारी भड़की जो पूरे देश में फैल गई। राजकीय स्वतंत्रता संग्राहलय के रिकार्ड के अनुसार 10 मई 1857 में शाम पांच बजे जब गिरिजाघर का घंटा बजा, तब लोग घरों से निकलकर सड़कों पर आ गए। सदर बाजार क्षेत्र में लोगों की भीड़ ने अंग्रेजों पर हमला बोल दिया। सदर कोतवाली पर भी भीड़ ने हमला बोल दिया। 11 मई की सुबह यहां से भारतीय सैनिक दिल्ली के लिए रवाना हुए और 14 मई को दिल्ली पर हमला बोलकर वहां अपना कब्जा कर लिया।

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