वजन कम करने और फिटनेस के लिए रनिंग में जूते का बड़ा रोल: डॉ शिवकुमार चौहान


नवीन चौहान.
हरिद्वार। वजन कम करने तथा फिटनेस के लिए रनिंग करना आज आम बात हो गई है। शरीर की रचना (स्ट्रक्चर) एवं वजन (वेट-मैनेजमेंट) की सही जानकारी के अभाव मे रनिंग का उतना लाभ व्यक्ति को फिटनेस में नहीं मिल पाता जितने की अपेक्षा लेकर व्यक्ति रोज रनिंग करता है।

यही कारण है कि रोज रनिंग करने वाले लोगों की फिटनेस भी प्रायः अधिक प्रभावी नजर नहीं आती है। गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ0 शिवकुमार चौहान ने शोध-छात्रों से ऑन-लाईन संवाद में यह बात कही।

उन्होंने शोध-छात्रों का मार्गदर्शन करते हुये कहा कि दौडना (रनिंग) इन दिनों लोगों में काफी पापुलर है। बडी संख्या में हेल्थ के प्रति जागरूक लोग दौडकर अपनी कैलोरी घटाना चाहते हैं। लेकिन सामान्य जानकारियों के अभाव में बेहतर परिणाम से वंचित रह जाते हैं। रनिंग में सबसे महत्वपूर्ण रोल जूतों का होता है।

रोजमर्रा रनिंग करने वाले अधिकांश लोग प्रायः घिसे-पुराने जूतों को रनिंग मे प्रयोग करते हैं। जिससे पैरों से जुडी अनेक समस्यायें पैदा हो सकती है। कभी-कभी यह लापरवाही जिसमें फ्लैट फुट जैसी जीवनभर की समस्या भी बन जाती है।

रनिंग करने के लिए बेहतर क्वालिटी के जूतों का उपयोग करने तथा जूतों की बनावट आपके पैरों की जरूरत के अनुसार होनी आवश्यक है। अच्छी क्वालिटी के शूज खरीदना भी एक तरह का निवेश ही है जो आप अपनी सेहत के लिए करते है। रनिंग शूज खरीदते वक्त अपनी रनिंग स्टाइल का ध्यान रखें। अलग-अलग तरह कै पैरों के अलग-अलग तरह के जूते बने होते हैं, लिहाजा आप कैसी ऐक्टिविटी करना चाहते हैं यह भी अहम है। लिहाजा किसी भी तरह का सस्ता जूता खरीदने की बजाए थोड़ा एक्सप्लोर करें और अच्छी क्वॉलिटी के रनिंग शूज ही खरीदना चाहिये।

कुछ लोगों को यह गलतफहमी होती है कि स्पोर्ट्स शूज और रनिंग शूज दोनों एक जैसे होते हैं लेकिन ऐसा नहीं है, दोनों अलग.अलग हैं। हर स्पोर्ट शू रनिंग शू नहीं होता। लिहाजा अगर आपका मकसद दौड़ना है तो स्पेसिफिकली रनिंग शूज ही खरीदें। रनिंग शूज खरीदते वक्त क्वॉलिटी से समझौता न करें क्योंकि अच्छी क्वॉलिटी के जूते ही पैरों के लिए जरूरी सपॉर्ट प्रदान कर सकते हैं। रनिंग शूज के सोल में इतना कुशन जरूर होना चाहिए ताकि आपके पैरों को छोटे—छोटे शॉक न लगें। डॉ0 चौहान ने कहॉ कि सेहत तथा फिटनेस के प्रति जागरूकता तथा दैनिक जीवन की छोटी छोटी व्यवस्था मे सुधार करके बेहतर एवं दीर्धकालिक सुधार प्राप्त किये जा सकते है।


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