राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर एक दिवसीय कार्यशाला, कुलपति प्रोफेसर पीपी सिंह ध्यानी ने कही ये बातें


नवीन चौहान.
ऋषिकेश पंडित ललित मोहन शर्मा श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन कार्यालय के अध्यक्ष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो पितांबर प्रसाद ध्यानी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यशाला में पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर के प्राचार्य प्रो गुलशन कुमार ढींगरा द्वारा सभी अतिथियों का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया।

कार्यशाला के संयोजक एवं कला संकाय के संकाय अध्यक्ष द्वारा कार्यशाला के उद्देश्य एवं क्रियान्वयन की जानकारी के साथ 4 तकनीकी सत्रों में मुख्य बिंदुओं पर होने वाली विषय से संबंधित जानकारी दी और नई शिक्षा नीति के उद्देश्य क्रियान्वयन से संबंधित चर्चा की। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पितांबर प्रसाद ध्यानी ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा प्रत्येक व्यक्ति के राष्ट्र के योगदान को निश्चित किया जाना है और गुणवत्ता परक शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति को मिले साथ ही शिक्षा के लिए मूलभूत सुविधाएं देनी होगी और राष्ट्र स्तर पर भारतीय उच्च शिक्षा सेवा आयोग बनाने का सुझाव दिया।

उद्घाटन सत्र के अंत में विश्वविद्यालय के रजिस्टार खेमराज भट्ट द्वारा आए अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर केके पांडे प्राचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय रुद्रपुर एवं विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर दिनेश चंद्र गोस्वामी एवं रिपोर्टिंग प्रोफेसर दिनेश शर्मा द्वारा की गई। विषय विशेषज्ञ प्रो गोस्वामी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि 1 वर्ष में सर्टिफिकेट कोर्स 2 वर्ष में डिप्लोमा एवं तृतीय वर्ष में डिग्री दी जाएगी, छात्राओं को किसी भी एक संकाय में एडमिशन लेना होगा, जिसमें दो कोर विषय और एक इलेक्ट्रिक विषय लेना होगा। छात्रों को भाषा की विशेषज्ञता के लिए करिकुलर विषय 6 सेमेस्टर तक लेना होगा। यह सभी संकाय के लिए जरूरी है।

तृतीय वर्ष में डीजरस्टेशन माइनर प्रोजेक्ट पांचवे और छठे सेमेस्टर में पूर्ण करने होंगे, उपस्थिति 75 प्रतिशत अनिवार्य होगी। जिसमें विशेष परिस्थितियों में संस्था अध्यक्ष द्वारा 25 परसेंट तक शिथिलीकरण दिया जा सकता है। सत्र के अध्यक्ष प्रो केके पांडे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे देश में युवाओं की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है इसलिए आने वाले समय में हमें स्किल युवाओं की आवश्यकता है। इसी के मध्य नजर रखते हुए नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन किया गया, जिससे रोजगार एवं नॉलेजेबल इकोनामी की स्थापना की जा सके एवं सांस्कृतिक पहचान मिल सके। प्रथम तकनीकी सत्र की संक्षिप्त विवेचना प्रोफेसर दिनेश शर्मा द्वारा प्रस्तुत की गई। द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर हरीश चंद्र पुरोहित दून विश्वविद्यालय देहरादून द्वारा की गई, विषय विशेषज्ञ प्रो सुमिता श्रीवास्तव द्वारा दो मेजर कोर विषय एवं माइनर इलेक्ट्रिक विषय स्किल विषय एवं इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग पर विस्तृत चर्चा की साथ ही प्रवेश प्रक्रिया संकाय चयन के बारे में बताया। प्रोफेसर पुरोहित द्वारा तकनीकी सत्र अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का ड्राफ्ट सभी को समझना जरूरी है, अभी यह संक्रमण काल से गुजर रहा है, इसके लिए इसी तरह की कार्यशाला का आयोजन जरूरी है और हर विषय में छात्रों का नामांकन करना जरूरी होगा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की विस्तृत जानकारी दी द्वितीय सत्र के अंत में प्रोफेसर प्रशांत कुमार सिंह द्वारा द्वितीय सत्र में दिए गए सुझावों की आख्या दी तथा सभी महाविद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विषय में महाविद्यालय के लिए स्पष्ट गाइडलाइन देना जरूरी बताया।

तृतीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर सतपाल साहनी प्राचार्य रायपुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय देहरादून द्वारा की गई, विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर विद्याधार पांडे द्वारा सह शैक्षणिक विषय के अंतर्गत पर्यावरण अध्ययन, वैदिक अध्ययन, मैनेजमेंट स्किल इन भगवत गीता, वैदिक गणित, मेडिटेशन, इंडियन ट्रेडिशनल सिस्टम और विवेकानंद आदि विषयपर चर्चा की, तकनीकी सत्र के अध्यक्ष प्रो साहनी द्वारा संबोधन में क्षेत्रीय स्किल बेस्ट कोर्स पर विस्तृत चर्चा की। अंत में प्रोफेसर मुक्ति नाथ यादव द्वारा सभी वक्ताओं की संक्षेप आख्या प्रस्तुत की। चतुर्थ एवं अंतिम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर डीसी नैनवाल प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोईवाला द्वारा की गई इस सत्र के मुख्य वक्ता प्रो डी के पी चौधरी द्वारा नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की। अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रोफ़ेसर नैनवाल द्वारा अपने संबोधन में कहा कि अभी हमारे पास संसाधन कम है, और प्रदेश के सभी महाविद्यालय द्वारा आगामी सत्र के लिए नामांकन कर लिए गए हैं, इसलिए सभी संबंधित महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय द्वारा स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जाए, क्योंकि कॉलेजों को एडमिशन देने में दिक्कत आ रही है और छात्रों को क्रेडिट सिस्टम में भी असमंजस है। सत्र के अंत में प्रो. शांति प्रकाश सती द्वारा तकनीकी सत्र की संक्षिप्त आख्या एवं सुधार प्रस्तुत किए गए। इस कार्यशाला में प्रदेश के सभी राजकीय महाविद्यालय एवं अशासकीय महाविद्यालय, प्राइवेट इंस्टिट्यूट वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परीक्षा नियंत्रक प्रो महावीर सिंह रावत, वाणिज्य संकाय अध्यक्ष प्रो आरएम पटेल, प्रो एके तिवारी प्राचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय बड़कोट, डॉ राजेश पालीवाल प्राचार्य हर्ष विद्या मंदिर, डॉ सुशील उपाध्याय चमन लाल महाविद्यालय हरिद्वार, बीएन शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय लश्कर, सहायक परीक्षा नियंत्रक एवं परिसर के सभी विषयों के विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापक उपस्थित रहे।


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