श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के ऋषिकेश परिसर को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना मेरा लक्ष्य: कुलपति ध्यानी

नवीन चौहान.
श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीपी ध्यानी ने कहा कि पंडित ललित मोहन शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय को श्रीदेव सुमन विवि का परिसर बनाने में विधानसभा अध्यश प्रेमचंद अग्रवाल और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत का अति महत्वपूर्ण योगदान है।
कुलपति ने कहा कि इनके प्रयासों से ही श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विवि को ऋषिकेश स्नातकोत्तर महाविद्यालय की समस्त भूमि-भवन हस्तांतरित हुए और अब महाविद्यालय में स्वीकृत पदों के सापेक्ष शिक्षकों का सविलियन (मर्जर) भी हो रहा है। कहा कि विश्वविद्यालय के लिए यह ऐतिहासिक क्षण है।

कहा कि अब 19 विभागों में 70 शैक्षिक पदों पर शिक्षकों को समायोजित करने की प्रक्रिया शासन द्वारा 20 सितंबर 2021 को निर्गत आदेशानुसार ऋषिकेश परिसर में चल रही है।इस पूरी प्रक्रिया में विष्वविद्यालय के मान्यता प्रभारी सुनील नौटियाल, प्र0 कुलसचिव प्रो0 एम0एस0 रावत और उप कुलसचिव खेमराज भट्ट की अति महत्वपूर्ण भूमिका रही है।जिसके लिये वे साधुवाद के पात्र हैं।

बताया कि कल 30 शिक्षकों का 13 विषयों में समायोजन हो चुका है और आज अभी भी समायोजन की प्रक्रिया जारी है। कुलपति डा0 ध्यानी सभी समायोजित
शिक्षकों की सेवा में आने पर स्वागत कर रहे हैं। शिक्षकों को कुलपति न केवल टिप्स दे रहे हैं बल्कि 15दिन का टास्क भी दे रहे हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति डा0 पी0पी0 ध्यानी ने आज ऋशिकेष परिसर में पहुंचकर पत्रकारों से वार्ताकर अपने विचार साझा किये। उन्होंने पं0 ललितमोहन शर्मा चैरिटेबल ट्रस्ट, ऋशिकेष का भी धन्यवाद ज्ञापित किया। इस ट्रस्ट ने विवि को प्राप्त हुयी 49.02 एकड भूमि को अगस़्त 1973 में ऋशिकेष में राजकीय डिग्री कालेज खोलने हेतु दान दी थी। डा0 ध्यानी ने अवगत कराया कि अब ऋशिकेष परिसर में पं0 ललित मोहन शर्मा जी की भव्य और दिव्य प्रतिमा स्थापित होगी। परिसर मेें हर वर्श पं0 ललित मोहन शर्मा स्मृति व्याख्यान का भी आयोजन किया जाएगा।

डा0 ध्यानी ने पत्रकारों से कहा कि जब उन्होने कुलपति का पदभार दिनांक 30 नवम्बर, 2019 को ग्रहण किया था तो सर्वप्रथम उन्होने देहरादून स्थित विवि के शिविर कार्यालय को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, ऋशिकेष में शिफ्ट कराया था। वह जब पहली बार ऋशिकेष स्नातकोत्तर महाविद्यालय पहुंचे थे तो उन्होने ऋशिकेष परिसर को एक उत्कृष्ट परिसर बनाने की सार्वजनिक रूप से पत्रकारों के समक्ष घोषणा की थी।

अब भूमि भवन हस्तातंरण और शिक्षकों के सविलियन से उनका यह स्वप्न साकार होने की दिशा में आगे बढ रहा है। इसलिये वह अभिभूत हैं। उन्हें पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में विवि का ऋशिकेष परिसर राष्ट्रीय एंव अन्तर्राष्ट्रीय छवि अवश्य प्राप्त करेगा ।

पत्रकारों से मुखातिब होते हुए डा0 ध्यानी ने ऋशिकेष परिसर हेतु अपनी दूरदर्षिता से सबको अवगत कराते हुये कहा कि अभी तक ऋशिकेष परिसर में मात्र 04 ही संकाय (कला, वाणिज्य, विज्ञान और शिक्षा) स्थापित हैं। अब विष्वविद्यालय परिनियम के अनुसार अन्य दो संकायों (विधि और कृषि) की स्थापना की प्रक्रिया शुरू की जायेगी।

साथ ही साथ परिसर के विभिन्न विभागों में रोजगारपरक सट्रिफिकेट एंव डिप्लोमा पाठ्यक्रमों (योग, जर्नलिज्म एण्ड मासकम्यूनिकेशन, होटल मैनेजमेंट, बिजनेस एकाउटिंग एंड टैक्सैसन, इकोटूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, विलेज टूरिज्म, रिलिजिएस टूरिज्म, फिटनेश एण्ड स्पोर्टस मैनेजमेंट, कम्प्यूटर एप्लिकेशन्स, वेब डिजाइनिंग एंड डैवलपमेंट, मेडिसिनल प्लांट कन्जरवेसन, पर्सनल्टी एण्ड स्कील डेवलप मेन्ट, डिजास्टर मैनेजमेंट, इन्डस्ट्रीयल माइक्रो बायोलाजी, मेडिकल लैब टैक्नोलाजी, जेरेएट्रिक हैल्थकेयर, मैथमैटिकल माडलिंग, नैचुरोपेथी, आफिस मैनेजमेंट, प्लाण्ट नर्सरी डैवलमेंट, इंगलिस स्पीकिंग एण्ड राइटिंग, आदि) का संचालन, नयी शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, व्यापक छात्र हित में शीघ्र शुरू किये जायेंगे।

ऋशिकेष परिसर में विवि के परिनियम के अनुसार विभिन्न रोजगारपरक विभागों (योगा, माइक्रोबायोलाजी, बायोटैक्नोलाजी, जर्नलिज्म एण्ड मास कम्यूनिकेशन, कम्प्यूटर सांइस, टूरिज्म, डिफेंस एण्ड स्टेटजिक स्टडीज, हास्पिटल एडमिनीट्रेसन, फार्मेसी, ड्राडंग एंडपेंटिग, बी0एड0, एम0एड0, एलएलवी, एलएलएम आदि) की स्थापना किया जाना भी जरूरी है। जिसके लिये वह शासन को स्वीकृति हेतु प्रस्ताव प्रेषित करेंगे।

डा0 ध्यानी ने बताया कि वें ऋशिकेष परिसर की राष्ट्रीय एंव अन्तराश्ट्रीय छवि बनाने के लिये वह अपने अनुभवों के आधार पर कुछ नया करना चाहते हैं। उन्होने कहाकि आज दुनिया में 195 देश हैं, जो यूनाईटेडनेशंस के सदस्य हैं, जिनमें से लगभग 136 देशों में पर्वत (माउंटेन्श) विध्यमानहैं। दुनिया के 21 देखें में कई बार भ्रमण करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि कहीं भी विवि में माउनटेन स्टडीज के कोर्स संचालित नहीं हैं, न ही कोई संकाय है और न ही कोई स्कूल है।

इसलिये अपने वैष्विक अनुभवों के आधार पर वह एक नया संकाय फैकल्टी आफ माउंटेनस्टडीज को ऋशिकेष परिसर में स्थापित करने की सोच रहे है, लेकिन इसके लिये उन्हे शासन/केन्द्र सरकार का सहयोग मिलना अति आवष्यक है। प्रस्तावित संकाय में अलग अलग विभागों (माउंटेन स्प्रीचुयेलिटी एण्ड सैक्रेडनस;माउंटेनआटर्स,कल्चर एण्ड ट्रेडिसन्स;माउंटेनलैंग्वेजेज, माउंटेनरिसोर्समैनेजमेंट, माउंटेन एग्रीकल्चर, माउंटेनटूरिज्म, माउंटेनडिजास्टर, माउंटेनसिक्यूरेटी,आदि) की स्थापना के लिये प्रयास किये जायेंगे।

ऋशिकेष परिसर में समायोजित शिक्षकों ने ने कुलपति डा0 ध्यानी का गर्मजोशी से स्वागत किया और ऋशिकेष परिसर को उत्कृश्ट बनाने हेतु अपने पूर्ण समर्थन और सहयोग देने का पूर्ण भरोसा दिया। ऋशिकेष व राज्य के कई गणमान्य व्यक्तियों ने ऋशिकेष स्नातकोत्तर महाविद्यालय को श्रीदेव सुमन विवि का परिसर बनाने हेतु राज्य सरकार के इस अहम फैसले की भूरि भूरि प्रसंशा की है।

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