कुंभ 2021: दो मुख्यमंत्री तमाम फैसले और कुंभ से भाजपा सरकार की विदाई


नवीन चौहान
​हरिद्वार कुंभ 2021 भाजपा के दो मुख्यमंत्री की कार्ययोजना के बाद परवान चढ़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोरोना संक्रमण काल के गंभीर हालातों को मददेनजर रखते हुए कुंभ पर्व को सीमित तरीेके से भव्य कराने की कार्ययोजना बनाई थी। लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने संतों की इच्छा के अनुरूप कुंभ में श्रद्धालुओं के आगमन से लेकर उनकी व्यवस्थाओं में तमाम परिवर्तन किए।

महामंडलेश्वर नगर से लेकर बैरागी और सन्यासी अखाड़ों को भूमि आवंटित कराने के आदेश जारी करते हुए मेला प्रशासन को बड़ा टास्क दे दिया। एक तरफ तो हरिद्वार की सभी सीमाओं पर यात्रियों की आरटीपीसीआर जांच को लेकर रस्साकसी चल रही है। दूसरी तरह शाही स्नान से चंद घंटों पहले महामंडलेश्वर नगर को बसाए जाने की तैयारियों पर रणनीति बनाई गई है। आखिरकार यह सब हो क्या रहा है। किसी की समझ से परे है। संतों की जिदद को पूरा करने के लिए हरिद्वार की जनता की जिंदगी खतरे में झोंक दी जायेगी। सरकार की मंशा पर यूं तो कई सवाल है। लेकिन जिस तरह की योजना बनाई जा रही है ​उसके कई भयंकर परिणाम भी देखने को मिलेगे। हरिद्वार में कुंभ व कोरोना संक्रमण के बीच में मेला प्रशासन बुरी तरह से पिस चुका है। मेला प्रशासन के गले—गले आ चुकी है। लेकिन कुल मिलाकर देखा जाए तो कुंभ की अव्यवस्थाओं से भाजपा सरकार की किरकिरी होना तय है। कुंभ ही भाजपा सरकार की विदाई का कारण साबित होने की दिशा में बढ़ रहा है।


हरिद्वार कुंभ 2010 की तर्ज पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने देर रात्रि मेलाधिकारी दीपक रावत को संतों को भूमि आवंटित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कुंभ को दिव्य और भव्य बनाने के लिए संतों की तमाम सुरक्षा और व्यवस्था को चाक चौबंद करने के आदेश जारी किए। गौरीशंकर और बैरागी क्षेत्र में महामंडलेश्वर नगर बसाए जाने की मेला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी। अपर मेलाधिकारी हरवीर सिंह ने बताया कि सरकार के निर्देशों के बाद मेला प्रशासन भूमि आवंटित करेगा और व्यवस्थाओं को पूर्ण कर देगा। अपर मेलाधिकारी हरवीर सिंह ने बताया कि दस अखाड़े और महामंडलेश्वरों को भूमि आवंटित करेंगे। सरकार के निर्णय को पूरा करने का कार्य मेला प्रशासन का है। इस कार्य को पूरा किया जायेगा।
अब बात करते है पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की। उन्होंने कुंभ पर्व 2021 को दिव्य और भव्य बनाने के साथ ही कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रखने की कार्ययोजना बनाई थी। उन्होंने स्थायी और अस्थायी कार्यो की सूची बनाकर उनको पूरा कराया। विभिन्न घाटों का निर्माण कराया। कोरोना संक्रमण के हालात को देखते हुए निर्णय लिए। भारत सरकार की एसओपी और हाईकोर्ट के आदेश का अक्षरश अनुपालन कराने की दिशा में योजनावद्ध तरीके से निर्देश दिए। अखाड़ा परिषद और तमाम अखाड़ों के संतों की मांग पर आईएएस अफसर दीपक रावत को मेलाधिकारी के पद पर तैनाती दी। मेलाधिकारी ने भी कुंभ कार्यो को निर्धारित वक्त में पूरा कराया। एकाएक उत्तराखंड में सियासी भूचाल आया और मुख्यमंत्री बदल गए।


नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कुंभ में सभी देशवासियों को स्नान के लिए आमंत्रित किया। संतों को खुश करने के लिए हैलीकाप्टर से पुष्प वर्षा कराई। संतों की सभी मांगों को सिर माथे पर रखा और निर्देश जारी किए गए। मेलाधिकारी दीपक रावत के ऊपर गढ़वाल कमिश्नर रविनाथ रमन को बैठा दिया गया। वही हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई तो कोरोना की आरटीपीसीआर जांच और एसओपी का पालन कराने के निर्देश दिए गए। हरिद्वार की तमाम सीमाओं पर सख्त चेकिंग शुरू हो गई। पुलिस परेशानी से बचने के लिए श्रद्धालुओं ने हरिद्वार आने से ही तौबा—तौबा कर ली। वही दूसरी ओर अब महामंडलेश्वर नगर बनाने के निर्देश जारी कर दिए। दूसरा शाही स्नान 12 अप्रैल को है और 8 अप्रैल को संतों को भूमि आवंटित करने का एकाएक निर्णय किया गया। जो किसी के गले नही उतर रहा है। जबकि कुंभ की तुलना साल 2010 से हो रही है। स्थिति और परिस्थिति विपरीत है।
साल 2010 में डॉ रमेश पोखरियाल निशंक मुख्यमंत्री थे। मेलाधिकारी आईएएस आनंद बद्र्धन और मेला आईजी आलोक शर्मा थे। अफसरों में बेहतर तालमेल था। कोरोना का कोई संकट नही था। बार्डर पर किसी को रोकना नही था। आरटीपीसीआर किसी की होनी ना थी। लेकिन वर्तमान हालात तो जनता की जिंदगी को खतरे की ओर इशारा कर रहे है। ऐसे में सरकार के निर्णय ही भाजपा की किरकिरी कराने लगे है। यहां तो विपक्ष की भी जरूरत नही है। बार्डर से वापिस जा रहे श्रद्धालु भाजपा सरकार की कार्यशैली पर ही सवालिया निशान लगा रहे है।अगर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने वक्त रहते हालातों को नही संभाला तो कुंभ महापर्व 2021 ही भाजपा सरकार से विदाई का सबसे बड़ा कारण बनेगा। जनता की नाराजगी को समझने की जरूरत है। संतों को समझाया जा सकता है। लेकिन जनता का जीवन सुरक्षित बचाना भी जरूरी है।

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