चर्बी लगे कारतूस चलाने से कर दिया था इंकार, ऐसे भड़की थी अंग्रेजों के खिलाफ विरोध की पहली चिंगारी

नवीन चौहान.
देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने की शुरूआत 1857 से हुई थी। इतिहास के पन्नों में दर्ज 10 मई 1857 वह तारीख है जिसमें मेरठ से पहली बार अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी 24 अप्रैल 1857 को हो गई थी।

इतिहासकार मानते हैं कि आजादी के स्वर्णिम इतिहास में दर्ज 24 अप्रैल 1857 के उस क्षण का कभी नहीं भुलाया जा सकता। इस दिन अंग्रेज सेना में शामिल भारतीय सैनिकों ने चर्बी लगे कारतूसों को चलाने से इंकार कर दिया था। यही से अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का पहला स्वर उठा था। जिसके बाद अंग्रेजों ने उन 85 सैनिकों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई की गई थी जिन्होंने चर्बी लगे कारतूस चलाने से इंकार कर दिया था।

राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्राहलय में इस बात के प्रमाण मौजूद है। इतिहास के पन्नों में यह साफ तौर पर दर्ज है कि 24 अप्रैल 1857 को 85 देशी सैनिकों ने चर्बी लगे कारतूसों को चलाने से इंकार कर दिया था। तब उन्होंने अंग्रेज अफसरों से कहा था कि उनका धर्म इसको प्रयोग करने की इजाजत नहीं देता। देसी सैनिकों द्वारा विद्रोह करने पर उनका कोर्ट मार्शल किया गया था। जिसके बाद यहीं से अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की पहली चिंगारी फूटी जो बाद में एक बड़ी ज्वाला के रूप में सामने आयी।

इतिहासकार बताते हैं कि जब आम जनता को पता चला कि अंग्रेज अफसर देसी सैनिकों पर जुल्म ढा रहे हैं तो उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी। जिसके बाद 10 मई को एक साथ मेरठ में कई स्थानों राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्राहलय में फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से उस वक्त अंग्रेजों ने देसी सैनिकों पर कितने जुल्म ढहाए यह सब दर्शाया गया है।

शहीद स्मारक परिसर में बने राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्राहलय में 1857 में हुई क्रांति के कुछ घटनाक्रमों को चित्रों के माध्यम से प्रदर्षित किया गया है। मेरठ जिले के राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्राहलय के अध्यक्ष डा. मनोज गौतम के मुताबिक 23 अप्रैल 1857 को अंग्रेज कर्नल कारमाइकल स्मिथ ने आदेश जारी कर 24 अप्रैल को सैनिकों के लिए परेड बुलायी थी। इसी परेड में चर्बी लगे कारतूस देसी सैनिको को बंदूक में प्रयोग करने के लिए दिए गए। बंदूक में कारतूस भरने से पहले उन्हें मुंह से खोलना पड़ता था, इन कारतूसों पर चर्बी लगी रहती थी जिस वजह से देसी सैनिकों ने इन कारतूसों का इस्तेमाल करने से इंकार कर दिया था।

देसी सैनिकों द्वारा चर्बी लगे कारतूस इस्तेमाल करने से इंकार करने पर कर्नल कारमाइकल स्मिथ के आदेश पर सभी 85 देसी सैनिकों को गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके बाद उनके खिलाफ इन्क्वायरी बैठायी गई। जांच में सभी को आदेश का पालन न करने का दोषी पाया गया। जिसके बाद सभी 85 देसी सैनिकों को कोर्ट मार्शल की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।

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