बाबा बर्फानी अस्पताल में 76 कोविड मरीजों की मौत डाटा एंटी आप्रेटर की लापरवाही या आंकड़े छिपाने का खेल


नवीन चौहान
जिंदगी और मौत के बीच अंतिम सांसे गिन रहे कोरोना संक्रमित मरीजों के जीवन को बचाने का चिकित्सों ने भरसक प्रयास किया गया तो हरिद्वार प्रशासन मौत के आंकड़ों में उलझ गया। कोरोना संक्रमित 76 मरीजों की मौत की गुत्थी उलझ गई। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने जब मौत के आंकड़े छिपाने की खबरों का संज्ञान लेते हुए जांच कराई तो डाटा एंट्री आप्रेटर की लापरवाही ​सामने आ गई। पोर्टल में कोविड मरीजों की एंट्री करने वाले डाटा एंट्री आप्रेटर और डाटा एंट्री नोडल अधिकारी की लापरवाही दिखाई दी। बाबा बर्फानी कोविड केयर सेंटर में कोरोना मरीजों की मौत के आंकड़ों पर कोई पर्दा डालने का प्रयास नही किया गया।

हरिद्वार के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, पुलिस थाने और मीडियाकर्मियों को कोविड मरीजों की मृत्यु की संख्या की पूरी जानकारी थी। पोर्टल में दर्ज नही कर पाने की लापरवाही डाटा एंट्री आप्रेटर की थी। जबकि वास्तविकता यह है कि जिलाधिकारी सी रविशंकर ने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया था कि किसी भी मरीज की इलाज के अभाव में मृत्यु नही होनी चाहिए। डीएम के निर्देशों के बाद गंभीर स्थिति के मरीजों को कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया गया और मौत का ग्राफ भी बढ़ गया। आंकड़ों की बात करें तो बाबा बर्फानी हॉस्पिटल में 16 मई 2021 तक 739 मरीज भर्ती किए। जिसमें से 307 होम आईसोलेशन में और 22 मरीजों को होटल में स्वास्थ्य लाभ दिया गया। 180 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया औी 148 को हायर सेंटर रैफर किया गया। जबकि 76 की मृत्यु हो गई। मरने वाले 57 मरीजों का आक्सीजन लेकर 60 प्रतिश से कम और 15 मरीजों का 61 से 85 प्रतिशत था। सभी मरीजों को बेहद ही नाजुक स्थिति में भर्ती किया गया था। जबकि उनका जीवन बचा पाना संभव नही था। लेकिन फिर जिलाधिकारी सी रविशंकर ने सभी मरीजों को अंतिम सांस तक अस्पताल का बेड और चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराकर मानवीय संवदेनाएं दिखलाई।
बताते चले कि जिलाधिकारी सी रविशंकर ने हरिद्वार में कोरोना संक्रमण के प्रवेश करते ही इंडस्ट्रीयल एसोसियेशन के सहयोग से उत्तरी हरिद्वार के दूदाधारी क्षेत्र में बाबा बर्फानी कोविड केयर सेंटर सीसीसी हल्के लक्षण के मरीजों के इलाज देने के शुरू कर दिया था। बाबा बर्फानी के प्रबंधकों ने सहयोग किया। कुंभ के दौरान डीसीएचसी के रूप में शुरू किया। अर्थात मध्यमवर्गीय मरीजों को भर्ती करने की सुविधा के लिए 100 आक्सीजन बेड की व्यवस्था बनाई गई। लेकिन बाबा बर्फानी कोविड केयर सेंटर में आक्सीजन लेबल 93 से 90 लेबल तक के मरीजों को ही भर्ती किया जा सकता है। अगर किसी मरीज का आक्सीजन लेबल इससे नीचे आता है तो उस मरीज को तकनीकी रूप से भर्ती नही कर सकते है। लेकिन जब हरिद्वार और देहरादून में कोरोना संक्रमण का जबरदस्त प्रकोप आ गया। देहरादून और हरिद्वार के सभी अस्पताल मरीजों से भर गए। निजी अस्पतालों के तमाम वैंटीलेटर भर गए। तब ऐेसे स्थिति में इलाज के अभाव में तड़प रहे मरीजों के परिजन ने जिला प्रशासन को फोन लगाए। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने बाबा बर्फानी कोविड केयर सेंटर की जानकारी ली। डीएम ने निर्देशित किया कि गंभीर से गंभीर मरीज को भी हॉस्पिटल में भर्ती किया जाए। मरीज के परिजनों को आक्सीजन सपोर्ट देने की जानकारी देकर मरीज को भर्ती करें। इलाज के अभाव में कोई मरीज दम नही तोड़ना चाहिए। मरीज को आखिरी वक्त तक बचाने का प्रयास किया जाए। भर्ती करने से पूर्व मरीज के परिजनों को बताया जाए कि आक्सीजन सर्पोट दिया जा सकता है और उनकी इच्छा पर ही भर्ती किया जाए। जिसके बाद से गंभीर से गंभीर स्थिति के मरीजों को भती करना शुरू कर दिया। वही दूसरी ओर निजी अस्पतालों ने मृत्यु दर को कम करने के लिए मरीजों को भर्ती करने से ही इंकार कर दिया था। इस दौरान अंतिम सांस के रूप में आक्सीजन देने के लिए बाबा बर्फानी अस्पताल में भर्ती कर दिया। जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई।
बाबा बर्फानी हॉस्पिटल में जिन 76
मरीजों की मृत्यु हुई है। उनमें से 57 मरीज बहुत ही गंभीर स्थिति में थे। इन मरीजों को बचा पाना बिलकुल भी संभव नही था। लेकिन फिर भी मरीज को आखिरी वक्त तक बाबा बर्फानी अस्पताल में इलाज दिया गया। इसी प्रकरण में जब मृत्यु दर की बात सामने आई तो डाटा एंट्री आप्रेटर लगातार चिकित्सा विभाग को जानकारी भेज रहा है। मरीज की मृत्यु की सूचना पुलिस विभाग को दी जा रही थी। लेकिन बात पोर्टल में अपलोड करने की है तो वहां घोर लापरवाही हुई। डाटा एंटी आप्रेटर को मरीजों की मृत्यु को अपडेट करना चाहिए था। जिसके बाद इन आंकड़ों की सही तरीके से मानीटरिंग भी नही की गई।
सच्चाई यह है कि मरीजों के आंकड़े तो प्रतिदिन आते है। आंकड़ों को छिपाया नही गया लेकिन पोर्टल में दर्ज करने लापरवाही की गई।
कुछ तकनीकि दिक्कत
कोविड केयर सेंटर में पॉजीटिव रिपोर्ट के मरीजों को भर्ती करने का नियम है। लेकिन जिलाधिकारी सी रविशंकर ने सभी कोविड मरीजों को लक्षण दिखाई देने पर इलाज देने की सुविधा की है। अगर आरटीपीसीआर पॉजीटिव रिपोर्ट नही है और सीटी स्कैन का रिपोर्ट है तो तत्काल मरीजों को भर्ती किया जाए। ऐसे कोविड मरीज पोर्टल में दर्ज नही हो पाते है। पोर्टल में सिर्फ पॉजीटिव रिपोर्ट के मरीज के आंकड़े की मिल पाते है।
नोडल अधिकारी भी पॉजीटिव
डाटा एंटी आप्रेटर के नोडल अधिकारी पंकज जैन कोविड पॉजीटिव हो गए। सीएमएस, सीएमओ की रिपोर्ट तो प्रतिदिन जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच रही थी। ऐसे में लापरवाही की बात तो समझ में आती है लेकिन आंकड़े छिपाने जैसी कोई गले नही उतर नही है।

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