कोरोना ने तोड़ी हरिद्वार की कमर, व्यापार हुए चौपट, किराये के भी टोटे

नवीन चौहान.

कोरोना महामारी ने वैसे तो पूरी दुनिया के कामकाज को प्रभावित किया है, देश में भी कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। इस महामारी का असर हरिद्वार के व्यापारियों पर गहरी चोट दे रहा है। कोरोना की वजह से लगी पाबंदियों में व्यापार खत्म होते जा रहे हैं। व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट मंडरा रहा है। ऐसे दुकानदारों की संख्या कम नहीं है जो अपना किराया और बिजली का बिल भी नहीं निकाल पा रहे हैं।

धार्मिक आयोजनों पर होती है कमाई
हरिद्वार शहर के दुकानदारों की मुख्य आय यहां होने वाले धार्मिक आयोजन और मेलों पर ​टिकी है। लेकिन जबसे कोरोना महामारी ने पैर पसारे हैं यहां धार्मिक मेले और अन्य आयोजन बंद हो गए हैं। सरकार केवल सांकेतिक कार्यक्रम करने की ही अनुमति दे रही है। जिससें बाहरी राज्यों से लोग नहीं आते।

दो साल से कांवड़ मेला बंद
उत्तर भारत का सबसे बड़ा कांवड़ मेला दो साल से बंद है। कांवड़ मेले में हरिद्वार शहर में करोड़ो का व्यापार होता है। लाखों की संख्या में यहां दूसरे राज्यों से कांवड़ियां पहुंचते हैं। जिस कारण न केवल शहर के सभी होटल धर्मशालाएं फुल रहती हैं बल्कि इन दिनों में छोटे दुकानदारों को भी खूब कमाई होती है। कांवड़ मेले से होने वाली कमाई से यहां के दुकानदार अगले कुछ दिनों तक चिंता में नहीं रहते।

कुंभ से थी आस लेकिन हुए निराश
इस बार हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन ​किया गया। व्यापारियों को उम्मीद थी कि 2020 में कांवड़ मेला न होने से जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई कुंभ मेले से हो जाएगी। यहां बड़ी संख्या में लोग कुंभ स्नान में आएंगे, जिससे बाजार में ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी और व्यापारियों को आय होगी। लेकिन यह सपना भी कुंभ के सांकेतिक आयोजन के आदेश से टूट गया।

इस बार भी कांवड़ मेला नहीं
व्यापारियों का कहना है कि इस साल भी सरकार ने कांवड़ मेला स्थगित कर दिया है। मेले से उम्मीद थी कि दो वक्त की रोटी का इंतजाम ठीक से होगा, दुकानों के खर्चें भी निकल आएंगे। लेकिन प्रतिबंध से यह आस टूट गई। मेले को लेकर जो थोड़ा बहुत सामान उधार उठाया था वह भी अब नहीं बिकेगा। पहले से ही दुकानदार आर्थिक संकट में है अब बाजार का कर्ज और सिर पर चढ़ जाएगा।

file photo

सरकार करें व्यापारियों की मदद
महामारी के कारण चौपट हो रहे कारोबार से परेशान व्यापारियों का कहना है कि सरकार को व्यापारियों को पैकेज देना चाहिए। उन्हें टैक्स में छूट देनी चाहिए। बिजली के बिल माफ करने चाहिए। बच्चों की स्कूल फीस में भी राहत दिलानी चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि शहर का कारोबार धार्मिक आयोजन और मेलों पर ही टिका है, वही नहीं हो रहे तो कमाई कैसे हो। हालात यही रहे तो उन्हें दुकानों पर ताले लगाने पड़ जाएंगे।

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