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‘वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे’ पर हरिद्वार में युवक ने की आत्महत्या

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नवीन चौहान
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के दिन हरिद्वार में एक युवक ने मौत को गले लगा लिया। जबकि पूरे विश्व की बात करें तो हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है। हरिद्वार जनपद में प्रतिदिन कोई ना व्यक्ति आत्महत्या करता रहा है। पुलिस आंकड़ों में दर्ज सुसाइड केसों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। हालांकि सामान्य तौर पर आत्महत्या के प्रकरण को संजीदगी से नही लिया जाता है। यही कारण है कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए कोई ठोस पहल नही की जाती है। मनोवैज्ञानिक, चिकित्सक और पुलिस प्रशासन की ओर से हरिद्वार में किसी प्रकार के कार्यक्रम का कोई आयोजन नही किया गया।
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की सुबह आत्महत्या करने वाले लखीमपुर खीरी के गूम गांव निवासी अजय 23 पुत्र विजय हरिद्वार के नवोदय नगर,सिडकुल में रहता था। उसकी आठ माह पूर्व ही शादी हुई थी। अजय का अपनी पत्नी गंगा से मामूली पारिवारिक बात को लेकर कहासुनी हो गई। जिसके बाद गंगा छत पर चली गई और अजय ने खुद को कमरे में बंद कर आत्महत्या कर ली। अजय के मन में कुछ क्षण के लिए जीवन के प्रति निराशा का भाव उत्पन्न हुआ और उसने मौत को गले लगा लिया। इस दौरान अगर कोई व्यक्ति अजय का मनोबल बढ़ता तो शायद वह आत्मघाती कदम नही उठाया। कमोवेश अधिकतम मामले इसी प्रकार के होते है। वर्तमान समाज में युवा पीढ़ी बेहद ही आक्रामक हो गई है। माता—पिता की छोटी सी बात भी उनके सम्मान को प्रभावित करती है। जिसका नतीता बड़ा ही भयावय होता है। हरिद्वार जनपद की बात करें तो यहां हर साल 300 से ज्यादा आत्महत्या के मामले सामने आते हैं। इनकी रोकथाम जरूरी है। लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है।
हरिद्वार के मेला अस्पताल में मनोचिकित्सक राजीव तिवारी ने बताया कि अगर किसी के मन में खुदकुशी के विचार आ रहे हैं तो किसी करीबी से बात साझा करनी चाहिए। हेल्पलाइन या पेशेवर परामर्शदाता या मनोचिकित्सक से बात करनी चाहिए। परिवार और दोस्त आसपास रहें। यह एहसास कराना चाहिए कि वह उस व्यक्ति से बहुत प्यार करते हैं और समझते हैं। उसके मन में जीवन के प्रति निराशा को बदलकर जीवन के प्रति आशा की किरण उत्पन्न करना ही विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की सार्थकता है।
आत्महत्या की दर और कारण
उम्र आधारित आत्महत्या की दरों पर नजर डालें तो साल 2016 में दुनियाभर में प्रति 1 लाख में 10.5 लोगों ने खुदकुशी कर ली थी। हालांकि, विभिन्न देशों के बीच दरों का अंतर 5 व्यक्ति से 30 व्यक्ति प्रति एक लाख तक है। दुनियाभर की 79% आत्महत्या की घटनाएं कम और मध्यम आय वाले देशों से सामने आईं। उन देशों की दर प्रति 1 लाख की आबादी पर 11.5 की रही। उच्च आय वाले देशों में महिलाओं के मुकाबले करीब तिनगुनी तादाद में पुरुष आत्महत्या कर लेते हैं। हालांकि, कम और मध्यम आय वाले देशों में खुदकुशी करने वाले पुरुषों और महिलाओं की संख्या लगभग बराबर होती है।
सड़क दुर्घना में आई कोई चोट 15-29 वर्ष की आयु के युवाओं में आत्महत्या का दूसरा प्रमुख कारण रही। वहीं, 15-19 वर्ष की आयु के किशोरों में आत्महत्या का एक बड़ा कारण आपसी हिंसा के रूप में सामने आया। महिलाओं के बीच आत्महत्या का प्रमुख कारण मैटरनल कंडिशंस के बाद की स्थितियों के रूप में सामने आया।
आत्महत्या का प्रचलित तरीका
आत्महत्या करने का सबसे अधिक प्रचलित तरीकों के रूप में फांसी लगाना, जहर खाना या खुद को आग के हवाले कर लेना रहा है। वही रेल के आगे कूदकर आत्महत्या करना, कीटनाशक का सेवन करने के मामले प्रकाश में आए है। वहीं, आत्महत्याओं की घटनाओं पर काबू पाने वाले कारगर तरीकों के रूप में इन साधनों तक लोगों की पहुंच कम करना, आत्महत्याओं से जुड़ी घटनाओं पर कवरेज को लेकर मीडिया को एजुकेट करना, युवाओं के बीच इस तरह के प्रोग्राम्स चलाना जो उन्हें जीवन में उपजे तनाव से निपटने में मदद करें, आत्महत्या के जोखिम को जांचकर जरूरतमंद लोगों की उनकी स्थिति के हिसाब से मदद करना हैं।

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