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प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित ने डीएवी स्कूल को माना मंदिर और पुजारी बनकर की सेवा

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प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित एक आदर्श व्यक्तित्व, रिटायरमेंट के दिन तक काम
नवीन चौहान
डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल के पूर्व प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित एक आदर्श व्यक्तित्व हैं। माता—पिता के संस्कार और गुरूजनों की शिक्षा को अपने सार्वजनिक जीवन में उतारकर डीएवी स्कूल को शिखर पर पहुंचाने में उन्होंने महती भूमिका अदा की। सेवानिवृत्ति के अंतिम दिन तक प्रधानाचार्य की कुर्सी पर ईमानदारी से कार्य करते हुए कर्तव्यनिष्ठा का धर्म निभाया। डीएवी के मुख्यद्वार के समीप बनी यज्ञशाला और स्कूल प्रांगण में लहलहाते हरे—भरे फूल, पेड़ और पौधे एक आदर्श व्यक्तित्व की कर्मठता और संस्था के प्रति समर्पण को बयां करते है। प्रधानाचार्य की कुर्सी पर काबिज रहते हुए पीसी पुरोहित जी ने स्कूल को मंदिर मानते हुए पुजारी बनकर सेवा की और शिक्षा का प्रसाद अपने विद्यार्थियों को दिया। प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित के नेतृत्व में एक दशक के भीतर डीएवी स्कूल ने तरक्की का सौपान किया और दो हजार बच्चों की संख्या वाला स्कूल वर्तमान में करीब 3800 बच्चों को संस्कारवान बनाने का कार्य कर रहा है। लेकिन आदर्श व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी ये रही कि प्रधानाचार्य की कुर्सी छोड़कर 11वीं और 12वीं के बच्चों को पढ़ाना नही भूले। जब भी वक्त मिला वह बच्चों को पढ़ाने पहुंच जाते थे।

डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल के पूर्व प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित जी का जन्म 7 मई सन 1960 को उत्तराखंड के दूरस्थ अति दुर्गम क्षेत्र पिंडरघाटी के ग्राम सुनाऊ तहसील थराली जिला चमोली में ​हुआ था। उनके शिक्षक पिता श्री घनानंद पुरोहित और माता जाहनवी ने बचपन से ही पीसी पुरोहित को अच्छे संस्कारों की नींव रखी। माता—पिता के संस्कारों को शिरोधार्य कर पीसी पुरोहित ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज से शुरू की। पढ़ाई में मेधावी पीसी पुरोहित ने गुरूजनों के आशीर्वाद से हायर एजूकेशन गोपेश्वर से की तथा वनस्पति विज्ञान में स्नातकोत्तर और बीएड की शिक्षा हासिल की। अपने पिता श्री घनानंद पुरोहित जी के बताए आदशों का अनुसरण करते हुए जीवन पथ पर आगे बढ़े। प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित जी ने देवभूमि उत्तराखंड का मान बढ़ाने और उत्तराखंड की संस्कृति से बच्चों को जोड़ने का कार्य किया। स्कूली बच्चों को राष्ट्रभक्त बनने की सीख दी। स्कूली कार्यक्रमों के आयोजनों के दौरान अपने संबोधन में उन्होंने सभी बच्चों में देशभक्ति के जज्बे को जगाया और एक आदर्श नागरिक बनने का ज्ञान दिया। पीसी पुरोहित जी प्रधानाचार्य की कुर्सी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के दौरान भी बीच—बीच में कुछ वक्त बच्चों को पढ़ाने के लिए कक्षाओं में चले जाया करते थे। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के अंतिम वक्त तक संस्था की सेवा की और अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन किया। आज 30 मई 2020 को उनके रिटायरमेंट के दौरान ​मौजूद शिक्षकों और स्टॉफ की आंखे भर आई थी। प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित ने पदभार छोड़ते हुए ​वरिष्ठ अध्यापक मनोज कपिल को चार्ज सौंप दिया। जिसके बाद सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित जी ने करीब एक दशक तक अपने साथ कार्य करने वाले सभी सहयोगी शिक्षक-शिक्षिकाओं व समस्त स्टॉफ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्कूल जिस मुकाम पर है। वहां तक पहुंचाने में सभी का योगदान है। उन्होंने सिर्फ अपना कर्तव्य निभाया है।


बिरला पब्लिक स्कूल नैनीताल से कैरियर की शुरूआत
श्री पीसी पुरोहित जी ने एक शिक्षक के तौर साल 1984 में 24 साल की आयु में ही बिरला पब्लिक स्कूल नैनीताल में जीव विज्ञान के प्रवक्ता के पद पर नौकरी पाकर अपना कैरियर आरंभ किया। करीब 22 सालों तक ​इस स्कूल में बच्चों को शिक्षित करने का कार्य किया। इसी दौरान साल 1997 से करीब एक दशक तक हाउस मास्टर के रूप में भी जिम्मेदारी का निर्वहन किया।

पीसी पुरोहित जी साल 2006 में पहुंचे डीएवी स्कूल
श्री पीसी पुरोहित जी की योग्यता और क्षमता को देखते हुए साल 2006 में आर्य समाज की अग्रणी संस्था अंबुजा सीमेंट कंपनी के डीएवी स्कूल सोलन, हिमाचल में बतौर प्रधानाचार्य के रूप में अपनी सेवाएं देने का अवसर मिला। करीब चार सालों तक डीएवी सोलन में शिक्षा के नए आयाम स्थापित किए। बच्चों को ​अच्छी शिक्षा के लिए अभिनव प्रयोग किए। बच्चों में शिक्षा और संस्कारों का बीजारोपण करने में उनको महारथ हासिल हो गई। डीएवी स्कूल सोलन एक विख्यात स्कूलों के तौर पर पहचाने जाने लगा। डीएवी प्रबंधकृत समिति ने पीसी पुरोहित जी मेहनत, लगन और कार्य करने की क्षमता को देखते हुए 31 मार्च 2010 को हरिद्वार डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल जगजीतपुर के प्रधानाचार्य पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी।

हरिद्वार डीएवी स्कूल में प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित
हरिद्वार डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल में प्रधानाचार्य का कार्यभार ग्रहण करते ही पीसी पुरोहित जी स्कूल को अपना मंदिर मानते हुए पुजारी के रूप में पूजा अर्चना शुरू कर दी। सुबह सबेरे पांच बजे उठना और स्कूल प्रांगण के तमाम स्थानों का भ्रमण करना, स्कूल कक्ष, खेल का मैदान का निरीक्षण करना और व्यव​स्थित बनाने के लिए दिशा निर्देश देना उनकी पहली प्राथमिकता बनकर रह गई। करीब दो हजार स्टूडेंटस वाले स्कूल की संख्या को ऊंचाईयों पर लाने के लिए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए अभिनव प्रयोग शुरू कर दिए। शिक्षक-शिक्षिकाओं को अपने परिवार का हिस्सा मानते हुए सभी को साथ लेकर स्कूल के विकास की खाका मस्तिष्क में तैयार किया।

भवन, खेलकूद का मैदान और यज्ञशाला का निर्माण
प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित जी ने अपने कार्यकाल में डीएवी स्कूल को सर्वश्रेष्ठ स्कूल बनाने की दिशा में कार्य शुरू किया। स्कूल के भवन को सुसज्जित रखना, साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना। स्कूली बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो, इसके लिए सभी सुविधाओं को पूरा किया। स्कूल में भवन का निर्माण कराया। खेलकूद के मैदान को बहुत शानदार तरीके से तैयार कराया। आधुनिक शिक्षा के लिए कंप्यूटर लैब को अपग्रेड कराया। स्मार्ट क्लासेज शुरू कराई। बच्चों को प्रतिभावान बनाने के लिए स्कूल में शिक्षा के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का संचालन शुरू कराया। स्कूली बच्चों में वेदों के ज्ञान का महत्व समझाने के लिए प्रत्येक वर्ष वैदिक चेतना सम्मेलन शुरू कराया।

पीसी पुरोहित जी प्रकृति प्रेमी
डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल प्रांगण में हरे भरे दिखने वाले पेड़ पौधे पीसी पुरोहित जी की कर्मठता और प्रकृति प्रेम की याद दिलाते रहेंगे। उन्होंने करीब एक दशक के भीतर सैंकड़ों पेड़ों को लगाकर स्कूल की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए। स्कूल परिसर में हरे भरे, पेड़ पौंधे स्कूल के पर्यावरण को संतुलित बनाने में अहम योगदान देते है। पीसी पुरोहित जी अपने अति व्यस्तम समय से प्रतिदिन कुछ वक्त पेड़ों के बीच जाकर गुजारते थे। कई बार खुद ही पेड़ों को खाद पानी देने का कार्य करते देखे गए। प्रकृति के प्रति उनके अनूठे प्रेम ने स्कूल के सभी शिक्षकों व स्टॉफ को प्रकृति से प्रेम करना सिखा दिया। प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित प्रकृति के अलावा पशु प्रेमी भी है। वह सड़कों पर घूमने वाली गायों को चारा भिजवाया करते थे। एक बार एक घायल गाय सड़क पर मिली तो उसको समीप के एक प्लाट में रखा। जहां उनको दवाई लगाई और उसके चारे की व्यवस्था की। गायों की कई दिनों तक सेवा करने के बाद एक उपयुक्त स्थान पर भेजा।

उनके कार्यकाल में खेलकूद प्रतियोगिताओं के सफल संचालन
प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित जी के कार्यकाल में डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल में वैसे से प्रतिवर्ष खेलकूद प्रतियोगिताओं के आयोजन कराए। लेकिन सबसे यादगार प्रतियोगिताएं साल 2012 में बालकों की डीएवी नेशनल मीट और साल 2017 में तीन हजार बालिकाओं की डीएवी नेशनल प्रतियोगिताएं रही। इस दौरान पूरे भारत वर्ष की डीएवी स्कूल की बेटियों का हरिद्वार आगमन हुआ। इन बच्चों की सुरक्षा और व्यवस्था को बहुत ही शानदार तरीके से प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित जी के कुशल नेतृत्व में निभाया गया। देश के तमाम स्कूलों के प्रबंधकों ने उनकी कार्य क्षमता को सराहा।

गरीबों के मसीहा है पीसी पुरोहित
डीएवी स्कूल के प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित जी गरीबों के मसीहा के तौर पर भी दिखाई दिए। एक बार एक आटो चालक को अपने पोते के एडमिशन की इच्छा हुई। जब इस बात की जानकारी पीसी पुरोहित जी को लगी तो उस आटो चालक को अपने कार्यालय में बुलवाया और उसके पोते को एडमिशन दिया। इसके अलावा कई बार गरीब बच्चों की फीस खुद अपने वेतन से देने का कार्य भी पीसी पुरोहित जी ने किया।

डीएवी स्कूल में पुरोहित अध्याय की समाप्ति लेकिन ज्ञान का दीप रहेगा प्रज्वलित
तो इस तरह डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल को मुकाम पर पहुंचाने वाले पीसी पुरोहित युग  का अध्याय समाप्त हो गया। उत्तराखंड की माटी में जन्मे पीसी पुरोहित ने एक आदर्श शिक्षक एवं कर्तव्यनिष्ठ प्रधानाचार्य के रूप में मां गंगा के तट पर हरिद्वार के बच्चों में संस्कारों के जो बीज बोये है। उनकी फसल लहलहाती रहेगी। स्कूल के बच्चे उनका नाम रोशन करते रहेंगे। उनके द्वारा पढ़ाए गए बच्चे उनके नाम को प्रज्वलित करते रहेंगे. एक शिक्षक के लिए इससे गर्व की बात नही हो सकती।

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