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एसएसपी बबलू कुमार की वो बात जो कांस्टेबलों के दिल को छू गई

नवीन चौहान
पुलिस महकमे में कांस्टेबल सबसे अहम पद होता है। थाने से लेकर पुलिस मुख्यालय, वीवीआईपी डयूटी से लेकर नौकरशाहों और मंत्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कांस्टेबल उठाते है। पुलिस डयूटी के बीच अगर कांस्टेबल से मामूली सी भी चूक हो जाए तो तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर और निलंबन की कार्रवाई से जूझना पड़ता है। पुलिस अधिकारियों की सबसे पहली गाज कांस्टेबल पर गिरती है। लेकिन भारत के इतिहास में ये पहली घटना है जब एक कानून के रक्षक ने कानून के रखवाले की वर्दी उतरवा दी हो। उस जवान का आत्मसम्मान गिरा तो उसका मनोबल बढ़ाने और वर्दी का सम्मान बरकरार रखने की जिम्मेदारी कानून के ही रखवाले युवा आईपीएस अफसर बबलू कुमार ने संभाली हो। एसएसपी बबलू कुमार की ये बात देश के विभिन्न राज्यों के कांस्टेबलों के दिल को छू गई है। जहां देश के सभी राज्यों के पुलिस कांस्टेबल आईपीएस बबलू कुमार को दिल से सम्मान दे रहे है। वही उत्तराखंड के भी पुलिस कांस्टेबल बबलू कुमार की कार्रवाई से बेहद खुश है। घटना का ताल्लकु आगरा से है।
26 जुलाई 2019 को एक व्रज वाहन जिला कारागार से किशोर बंदियों को लेकर मलपुरा क्षेत्र के सिरोली रोड़ स्थित किशोर न्याय बोर्ड जा रहा था। इसी दौरान किशोर न्याय बोर्ड के जज संतोष कुमार यादव अपनी कार से आ रहे थे। सिसोली रोड़ पर व्रज वाहन आगे था और पीछे न्यायायिक जज का वाहन था। जज के वाहन चालक ने ब्रज वाहन चालक को साइड देने के लिए हार्न और हूटर बजाया। लेकिन व्रज वाहन चालक हूटर की आवाज सुन नही पाया या क्या कारण रहा जज का वाहन आगे नही निकल पाया। यही विवाद की वजह बनी।
व्रज वाहन जब कोर्ट परिसर में पहुंचा तो उसके पीछे जज भी कार से पहुंच गए। जज ने व्रज वाहन चालक को कक्ष में बुलवाया और जमकर फटकार लगाई। बात यही पर नही रूकी उन्होंने चालक की वर्दी भी उतरवा दी। इस घटना के वक्त काफी लोग इस घटना को देखते रहे। इसी दौरान किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दे दी। पुलिस महकमे में वर्दी उतरने की खबर आग की तरह फैल गई। पुलिस अधिकारियों ने जज से बातचीत करने के बाद चालक को वर्दी पहनने दी गई।
व्रज वाहन चालक घूरेलाल ने सीओ को पूरे मामले की जानकारी दी। सीओ ने पूरे प्रकरण की जानकारी एसएसपी बबलू कुमार को दी। जिसके बाद बबलू कुमार ने इस मामले में जांच के आदेश दिए। एसपी पश्चिम रवि कुमार व तमाम पुलिस अधिकारियों ने कांस्टेबल घूरेलाल व अन्य कांस्टेबलों के बयान दर्ज कराए।
एसएसपी बबलू कुमार ने जनपद न्यायाधीश को मौखिक तौर पर प्रकरण की जानकारी दी।इस संबंध में उनकी तरफ से एक लिखित रिपोर्ट हाईकोर्ट प्रयागराज के रजिस्टार जनरल मयंक कुमार जैन, हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एवं आगरा परिक्षेत्र के प्रशासनिक न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंडारी, जिला जज अजय कुमार श्रीवास्तव को दी गई। वही दूसरी ओर एसएसपी बबलू कुमार ने पुलिस लाइन के आरआई को कांस्टेबल घूरेलाल को अकेला नही छोड़ने के निर्देश दिए। एसएसपी बबलू कुमार ने पीडि़त कांस्टेबल घूरेलाल की मनोदशा को समझते हुए उसका मनोबल बनाये रखा साथ ही न्याय की उम्मीद की किरण भी जगा दी। यूपी पुलिस की निगाहे एसएसपी बबलू कुमार पर टिकी थी। बबलू कुमार न्यायायिक व्यवस्था के सामने कानून के रखवाले वर्दी के सम्मान की गरिमा को बरकरार रखने में जुटे थे। जिसके बाद जज संतोष कुमार यादव का तबादला हुआ और विभागीय जांच बैठ गई है। लेकिन इस पूरे प्रकरण के बाद युवा आईपीएस बबलू कुमार ने वर्दी का गौरव बढ़ाया और कांस्टेबल घूरेलाल का आत्म सम्मान के लिए पहल की। यह बात देशभर के तमाम कांस्टेबलों के दिल को छू गई।

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