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योग और आयुर्वेद को घर—घर पहुंचाने वाला पतंजलि योगपीठ

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सोनी चौहान
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण का जन्म दिवस ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पतंजलि भारतीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज) के तत्त्वावधान में “International Seminar on Integrated Approach to Autoimmune Disorders” विषय पर एक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए उत्तराखण्ड की राज्यपाल बेबी रानी मोर्य ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पतंजलि योगपीठ विगत लगभग 24 वर्षों से अपनी विविध सेवापरक गतिविधियों से समाजसेवा व राष्ट्रसेवा में संलग्न है। पतंजलि के दो मजबूत स्तम्भ हैं- एक योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज जिनकी योग की क्रियाओं से हम प्रत्येक सुबह की शुरुआत करते हैं तथा दूसरे आचार्य बालकृष्ण जी महाराज जिन्होंने विश्व में आरोग्यता के सूत्रपात का संकल्प लिया है। कहा कि पतंजलि ने योग व आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर ख्याति दिलाई है। योग का उद्भव उत्तराखण्ड से हुआ, इसलिए इसे देवभूमि कहा जाता है। हमारी ऋषि परम्परा में योग व आयुर्वेद मानव जीवन का आधार है। योग जीवन में सकारात्मक संतुलन स्थापित करता है तथा आयुर्वेद आरोग्य प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आमजन को जड़ी-बूटी की पहचान व प्रयोग के ज्ञान से परिचित कराना नितान्त आवश्यक है।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि योग व आयुर्वेद की सबसे बड़ी संस्था है। श्रद्धेय आचार्य जी का सम्पूर्ण जीवन क्रियाशील, गुणात्मक, रचनात्मक तथा निरंतर समाज की सेवा में रहा है। आयुर्वेद की पुस्तकों के लेखन व प्रकाशन, पाण्डुलिपियों के संरक्षण, आयुर्वेदिक औषधियों की खोज व अनुसंधान, आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार तथा आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्वीकृति दिलाने में श्रद्धेय आचार्य जी महाराज निरंतर क्रियाशील रहे हैं। आचार्य जी के कुशल नेतृत्व में आयुर्वेदिक औषधियों को एडवांस मेडिसिन के रूप में मान्यता दिलाने का कार्य पतंजलि अनुसंधान के माध्यम से किया जा रहा है। पतंजलि के मूल में पूर्वजों की वैदिक ज्ञान परम्परा है। मैकाले की दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली को समाप्त कर पतंजलि भारतीय शिक्षा व्यवस्था को स्थापित करने में का कार्य भी पतंजलि द्वारा निष्पादित किया जा रहा है। पतंजलि सेवा के नित नये सोपान चढ़ता जा रहा है, नए-नए इतिहास गढ़ता जा रहा है। चरैवेति-चरैवेति की हमारी साधना अभी चल रही है, अभी गणतव्य दूर है।


श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने कहा कि पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज द्वारा ऑटोइम्यून डिसऑर्डर के लिए एकीकृत दृष्टिकोण पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन का लक्ष्य आयुर्वेदीय चिकित्सा सिद्धांतों को आधुनिक परिवेश में परिलक्षित एवं परिभाषित करना है। उन्होंने कहा कि स्व-प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने हेतु आयुर्वेद से श्रेष्ठ कोई चिकित्सा पद्धति नहीं है। आयुर्वेद रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने पर बल देता है जिससे कोई भी रोगी न हो। आचार्य जी महाराज ने कहा कि एक पुस्तक तैयार करने में वर्षों लग जाते हैं किन्तु पतंजलि प्रतिवर्ष उत्कृष्ट ज्ञान से भरपूर दर्जनों पुस्तकों के प्रकाशन का कार्य निरंतर कर रही है। इसी कड़ी में आज जड़ी-बूटी दिवस के अवसर पर हस्तलिखित ग्रन्थों पर आधारित 11 ग्रन्थों- बिन्दुसारः, गोविन्ददासोत्सवः, आयुर्वेद ज्ञानावली (भाग-1), आयुर्वेद ज्ञानावली (भाग-4), राज-निघण्टुः, मदनपाल-निघण्टुः, सरस्वती-निघण्टुः, अभिधानरत्नमाला, पर्यायरत्नमाला, वैदिक ब्रमचर्य गीत तथा वेज़ टुवर्डस हैप्पी लाइफ को लोकार्पित किया जा रहा है। आचार्य जी ने कहा कि पतंजलि के पास 40 हजार पाण्डुलिपियों का डिजिटल संग्रह है।


विशिष्ट अतिथि कैबिनेट आयुष मंत्री, आयुष शिक्षा, उत्तराखण्ड सरकार डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि पहले जब योग की बात आती थी तो यह उत्तराखण्ड व हिमालय की गुफाओं तक ही सीमित था। पूज्य स्वामी जी व श्रद्धेय आचार्य जी महाराज के सहयोग से यह आज देश व समाज की सीमाओं को तोड़कर सम्पूर्ण विश्व को स्वास्थ्य प्रदान कर रहा है। उन्होंने स्वामी जी से आग्रह किया कि पतंजलि के समुचित मानवता के अभियान में मुझे सहयोगी बनने का अवसर प्रदान करें।
उद्घाटन सत्र के पश्चात आई.पी.जी.टी.आर. एण्ड , गुजरात के पूर्व निदेशक, प्रो. एम.एस. बघेल ने आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार ऑटोइम्यून विकार की समझ और प्रबंधन, जीएसी, त्रिरुवंतपुरम, केरल के रोग निदान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एस. गोपा कुमार ने रुमेटोइड अर्थराइटिस के प्रबंधन में आयुर्वेद की भूमिका तथा पुणे, महाराष्ट्र के विख्यात आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य दिलीप पी. गाडगिल ने ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस के प्रबंधन में आयुर्वेद की भूमिका विषय पर अपने सार प्रस्तुत किए।
जड़ी-बूटी दिवस के पावन अवसर पर मदर टेरेसा ब्लड बैंक, रुड़की के सहयोग से एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। पूज्य स्वामी जी महाराज, श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज तथा शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने रक्तदान कर समाज को रक्तदान के लिए प्रेरित किया।  रक्तदान शिविर का सफल संयोजन ड्रग डिस्कवरी एवं डवलपमेंट डिविजन के उपाध्यक्ष डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने किया। रक्तदान शिविर में पतंजलि योगपीठ के समस्त परिसरों में सेवारत कर्मयोगी भाई-बहन, आजीवन सेवाव्रती एवं शैक्षणिक संस्थानों के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर सहभागिता की। जिसमें लगभग 400 युनिट ब्लड एकत्र किया गया।


जड़ी-बूटी दिवस के अवसर पर इफ्को के सहयोग से 40,000 नीम के पौधे निःशुल्क वितरित किए गए। महामहीम राज्यपाल महोदया ने नीम का वृक्ष रोपित किया। सायंकालीन सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कथावाचक चित्रलेखा, कथावाचक चिन्मयानंद बापू, इफ्को के वित्तीय प्रबंध निदेशक योगेन्द्र कुमार, नेपाल के वित्त मंत्री  किरण गुरूंग, उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार,  प्रदीप आर्य, प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिओम पँवार, हाम्रो स्वाभिमान नेपाल सेनारायण,  प्रेम क्षेत्री,  अनीता, पीरान कलियर से छोटे मियाँ के नेतृत्व में मुस्लिम समाज के लोग, मौलाना शमीम काश्मी, पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज के अधीक्षक डॉ. डी.एन. शर्मा, उपाधीक्षक डॉ. दयाशंकर, कॉलेज के प्राध्यापकगण, छात्र-छात्राएँ तथा पतंजलि योगपीठ से सम्बद्ध समस्त संस्थानों के कर्मयोगी भाई-बहन, अधिकारीगण तथा सेवाव्रती भाई-बहनों ने आचार्य को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ प्रेषित की।

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