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बच्ची को सुरक्षित पहुंचाकर खुद की बेगुनाही के लिए गिड़गिड़ता रहा वैन चालक

soni chauhan
एक स्कूली बच्ची के घर नहीं पहुंचने की सनसनीखेज घटना पुलिस को झोल दिलाई दी। जहां वैन चालक देवेंद्र ने बड़ी सूझबूझ से बच्ची को उसके पिता के पड़ोस के घर पर महिला के पास सुरक्षित सुपुर्द करने के बाद बच्ची के पिता से फोन पर बात कराई गई। चालक ने बारिश के पानी के कारण हाथ गीले होने के चलते पड़ोसी महिला से फोन कराकर बच्ची के पिता को सूचना दी थी। वही पुलिस भी चालक की बात से पूरी तरह संतुष्ट नजर आई। पुलिस भी मानती कि वैन चालक ने अपना कार्य पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से किया। ऐसे में पुलिस से शिकायत करके चालक पर गंभीर आरोप लगाना और स्कूल प्रबंधन की बीच में लपेटना किसी के गले नही उतर रहा है। जबकि प्राइवेट वैन का स्कूल प्रबंधन से कोई सरोकार नही है। अभिभावक खुद अपनी मर्जी से ही स्कूल के बाहर खड़ी वैन चालकों से बातचीत कर अपने बच्चों की जिम्मेदारी सौंपते है। घटना कनखल क्षेत्र की है।
भारतीय किसान यूनियन के नगर अध्यक्ष अभिषेक शर्मा कनखल के बी-17 गणेशपुरम में रहते है। अभिषेक शर्मा ने जगजीतपुर चौकी पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उसकी पांच साल की बेटी डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल में पढ़ती है। जो कि स्कूल से अटैच वाहन एक वैन से प्रतिदिन स्कूल जाती है और आती है। 11जुलाई को 12 बजकर 45 पर उनका बेटी स्कूल से निकली और वैन में बैठी लेकिन घर नही पहुंची। जब परिवार के लोग चिंतित हुए तो स्कूल प्रबंधन और वैन चालक से संपर्क किया तो असंतुष्ट जवाब मिला। बकौल अभिषेक की तहरीर के मुताबिक चालक ने कहा कि बच्चे को रोड़ पर ही छोड़ दिया गया था। क्योकि वैन चालक के पास समय नही था। बहुत खोजने के बाद मेरा बच्चा डरा सहमा हमे मिल तो गया। लेकिन श्री मान ही इस भयभीत माहौल में मेरी फूल सी बच्ची को कुछ हो जाता तो इसका जवाब कौन मुझे देता। अतः इस घटना को अपराध मानते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई। इस तहरीर के मिलते ही जगजीतपुर चौकी पुलिस ने वैन चालक देवेंद्र भारद्वाज को बुलाया। वैन चालक देवेंद्र ने अभिभावक अभिषेक की मौजूदगी में पुलिस को पूरा सच बता दिया। देवेंद्र की बातों से पुलिस भी संतुष्ट नजर आई। लेकिन पीडि़त बताने वाले अभिभावक अभिषेक ने चालक और स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाना नही छोड़ा। एआरटीओ प्रवर्तन सुरेंद्र कुमार ने बताया कि अभिभावक का फोन आया था। वैन चालक के कागजों के संबंध में जानकारी कर रहे थे। उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बात की गई थी। वैन स्कूल वैन का पंजीकरण हो रखा है। नियमानुसार वैन स्कूली बच्चों को ले जा सकती है। जगजीतपुर चौकी के उप निरीक्षक जयपाल ने बताया कि शिकायत के बाद चालक देवेंद्र से पूछताछ की गई थी। लेकिन चालक बेकसूर था। बच्ची पूरी तरह से सुरक्षित । अभिभावक ने कार्रवाई करने से इंकार करते हुए लिखकर दिया। जिसके बाद चालक को छोड़ दिया गया।
पुलिस चौकी से डीएम, एसएसपी एआरटीओ को फोन
अभिभावक अभिषेक ने जगजीतपुर पुलिस चौकी से ही डीएम, एसएसपी और एआरटीओ को फोन घनघनाने शुरू कर दिए। पुलिस की कार्यशैली पर संदेह जताया गया। इस सनसनीखेज घटना की जानकारी दी गई। एआरटीओ सुरेंद्र कुमार ने तो स्कूली वैन की चेकिंग कराने की बात की। जबकि एसएसपी जनमेजय प्रभाकर खंडूरी ने वैन चालक और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के मौखिक आदेश तक दे दिए। लेकिन एसओ कनखल हरिओम राज चौहान ने एसएसपी साहब को पीडि़त की शिकायत और चालक से पूछताछ के बाद सच्चाई बताई तो सभी सन्न रह गए।
स्कूल वैन चालक देवेंद्र की ईमानदारी और आत्मसम्मान पर प्रहार
डीएवी सेंटेनरी स्कूल के बाहर खड़े होकर निजी स्कूल वैन चलाने वाले देवेंद्र भारद्वाज 61 साल के है। देवेंद्र भारद्वाज कनखल के सर्वप्रिय विहार कालोनी में रहते है। देवेंद्र ने अपनी वैन का पंजीकरण स्कूल वैन के तौर पर संभागीय परिवहन विभाग में किया गया है। स्कूल वैन चलाकर अपनी दो पोतियों को भी डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल जगजीतपुर में ही पढ़ाते है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम से देवेंद्र बेहद आहत है। उनकी आंखों में आंसू है। देवेंद्र ने बताया कि इस बच्ची को एक साथी चालक ने स्कूल लाने लेजाने की जिम्मेदारी दी थी। बच्ची का घर के बाहर तक वाहन नही पहुंच सकता है। इस बात की जानकारी बच्ची के पिता को दे दी गई थी। एक दिन पूर्व ही घर देखा था। पड़ोस की एक बच्ची और स्कूल आती है। इसीलिए इस बच्ची को पड़ोसी के पास सुपुर्द कर पिता से बात कराई गई। बारिश के कारण उनके हाथ गीले थे। जबकि पड़ोसी भी बच्चों को वैन से उतारकर बारिश से बच्चों को बचाते हुए छाते में लेकर गई थी। कहा कि बच्चों हमारी जिम्मेदारी है। इसीलिए उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। लेकिन इस तरह के आरोप के बाद वह बेहद दुखी है। उनके आत्मसम्मान को ढेस पहुंची है।
ऑटो वैन से स्कूल का कोई संबंध नही
प्रधानाचार्य पीसी पुरोहित ने कहा कि इस प्रकार की घटना पहली बार सामने आई है जो कि समझ से परे है। बच्ची सकुशल है ये गनीमत की बात है। डीएवी सेंटेनरी स्कूल बच्चों को बस सर्विस प्रोवाइड कराता है। जिसमें चालक, परिचालक के साथ एक महिला हेल्पर भी होती है। महिला हेल्पर ही बच्चियों को उतारती और चढ़ाती है। स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर संजीदा है। लेकिन स्कूल के बाहर खड़ी होने वाली वैन से प्रबंधन का कोई संबंध नही है। अभिभावक खुद ही अपनी मर्जी से वैन और ऑटो की सेवाएं लेते है। बाकायदा अभिभावकों को सूचित किया गया है कि ऑटो वैन की सेवाएं आपकी अपनी है। अभिभावक जिस वैन चालक की जिम्मेदारी स्कूल को सौंपता है। उसी चालक को बच्चे ले जाने की अनुमति है। सभी बच्चों के सुरक्षित आने और जाने की नैतिक जिम्मेदारी स्कूल की है। स्कूल के बाहर नोटिस बोर्ड भी लगाया हुआ है कि वैन और ऑटो का स्कूल से कोई संबंध नही है।

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